पप्पू यादव का कहना है कि न्यायालय के निर्णयों को हम सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं लेकिन कई बार सरकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर फैसले आते हैं, जिनसे सवाल उठते हैं. उदाहरण के तौर पर गोरेगांव और मालेगांव की घटनाओं में सीबीआई की जांच पर भी सवाल खड़े हुए हैं. न्याय में देरी एक बड़ी समस्या है क्योंकि आरोपी को अधिक समय तक जेल में रखने से न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है. इसीलिए स्पीडी ट्रायल का महत्व बढ़ जाता है ताकि समय पर निर्णय हो और आरोपी का वक्त वक़्त पर वापिस मिल सके.