स्पीकर ओम बिरला का कहना है कि हमारे संसदीय लोकतंत्र की स्थापना संविधान निर्माताओं के गहन विमर्श और अनुभव पर आधारित है. स्वतंत्र भारत के संविधान में संसदीय लोकतंत्र को शासन की सर्वश्रेष्ठ पद्धति माना गया है. इस व्यवस्था में संसद का कार्य केवल कानून बनाना ही नहीं बल्कि यह राष्ट्र की लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र बिंदु भी है. सदस्यों के बीच सहमति और असहमति की परंपरा यहां लोकतंत्र की जीवंतता और मजबूती को दर्शाती है.