लोक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा तुलसीदास को मुगल सम्राट अकबर की कैद में मिली थी. अकबर की कैद से बाहर आने का तुलसीदास के पास कोई रास्ता नहीं बचा था. तब उनमें ये विश्वास पैदा हुआ कि एकमात्र संकटमोचन हनुमान ही उन्हें इस मुसीबत से बचा सकते हैं. तब तुलसीदास ने हनुमान चालीसा लिखने का संकल्प लिया.