अजित पवार की अंतिम विदाई के मौके पर उनकी प्रभावशाली छवि दिखी. रैलियों में अक्सर लोगों को बुलाना पड़ता है, लेकिन जब अंतिम विदाई की घड़ी आती है, तब कितने लोग अपने आप ही वहां पहुँच जाते हैं. यह इस बात का संकेत है कि अजित पवार में कितना दम था और उनकी लोकप्रियता कितनी गहरी थी.