इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों पर सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि बिना जरूरत फायरिंग करना पूर्णतः अस्वीकार्य है. कोर्ट ने बताया कि अपराधी को सजा देना पुलिस का जिम्मा नहीं न्यायालय का है. सोशल मीडिया की वाहवाही और प्रमोशन के लिए फायरिंग करना खतरनाक है. सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस का पालन जरूरी है और नियम तोड़ने पर एसपी एवं एसएसपी जिम्मेदार होंगे. उच्च न्यायालय ने सरकार से पूछताछ की है कि क्या मुठभेड़ों पर कोई लिखित या मौखिक निर्देश दिए गए हैं. यह एक गंभीर सवाल है क्योंकि उत्तर प्रदेश से लगातार इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं.