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Carl Gustaf M4: भारत में ही बनेगा 'महाहथियार', एक ही वेपन से दाग सकते हैं कई तरह के रॉकेट

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 10:28 AM IST
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स्वीडन (Sweden) की बड़ी डिफेंस कंपनी साब (SAAB) अब कार्ल गुस्ताफ एम4 रिकॉयललेस राइफल (Carl Gustaf M4) का निर्माण भारत में करना चाहती है. इस वेपन सिस्टम (Weapon System) को साब की नई सब्सिडियरी कंपनी साब एफएफवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड करेगी. कंपनी का कहना है कि वह पहली बार अपने देश यानी स्वीडन से बाहर कोई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने जा रही है. (फोटोः SAAB)

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SAAB के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गॉर्जेन जोहान्सन ने कहा कि हम कार्ल गुस्ताफ एम4 रॉकेट लॉन्चर (Carl Gustaf M4 Rocket Launcher) की टेक्नोलॉजी भारत को हस्तांतरित कर देंगे. भारत में बना पहला हथियार साल 2024 में तैयार हो जाएगा. हालांकि हमें सरकार से अभी अनुमति मिलनी बाकी है. लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही मिल जाएगी. यूनिट कहां और कैसे लगेगी इसकी जानकारी भी जल्द दी जाएगी. (फोटोः SAAB)

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गॉर्जेन जोहान्सन ने कहा कि भारतीय सेना (Indian Army) ने साब से पहले ही M4 वैरिएंट मंगा रखे हैं. हम भारत में जब प्रोडक्शन शुरू करेंगे, तो सबसे पहले भारतीय मिलिट्री और अर्धसैनिक बलों की मांगों को पूरा करेंगे. उसके बाद हथियारों को स्वीडन ले जाकर, फिर वहां से उनका अंतरराष्ट्रीय डील होगा. हमारी कंपनी भारतीय डिफेंस कंपनियों के साथ 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम के तहत पार्टनरशिप करने को तैयार है. अब जानते हैं कि आखिर इस हथियार की खासियत क्या है? (फोटोः SAAB)

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कार्ल गुस्ताफ एम4 रिकॉयललेस राइफल (Carl Gustaf M4 Recoilless Rifle) कंधे पर रख कर दागा जाने वाला हथियार है. इसके चार वैरिएंट हैं. M1 को 1946 में बनाया गया था. M2 को 1964 में बनाया गया था. M3 को 1986 में बनाया गया था. (फोटोः विकिपीडिया)

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भारतीय सेनाओं के पास यह वैरिएंट पहले से है. उसका उत्पादन भारत में ही होता है. M3 को भारत में म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड (MIL) और एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) मिलकर बनाते हैं. भारत की ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड कार्ल गुस्ताफ एम3 को भारत में ही बना रही है. उसकी रेंज 1200 मीटर है. उसका उत्पादन भी भारत में जारी रहेगा. (फोटोः SAAB)

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कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) को 2014 में बनाया गया है. यह दुनिया के अत्याधुनिक रॉकेट लॉन्चरों में से एक है. इसका वजन 6.6 किलोग्राम है. लंबाई 37 इंच है. इसे चलाने के लिए दो लोगों की जरुरत होती है. एक गनर और दूसरा लोडर. इसमें 84 मिलिमीटर व्यास और 246 मिलिमीटर लंबा रॉकेट लगता है. यह एक मिनट में छह राउंड दाग सकता है. (फोटोः SAAB)

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इस रॉकेट लॉन्चर से दागे जाने के बाद इसके गोले अधिकतम 840 फीट प्रति सेकेंड की गति से आगे बढ़ते हैं. यानी 918 किलोमीटर प्रतिसेकेंड की गति. अगर दुश्मन चलती फिरती गाड़ी में है तो इसकी सटीक रेंज 400 मीटर है. गाड़ी खड़ी है तो 500 मीटर. अगर स्मोक और हाईएक्सप्लोसिव गोले का उपयोग करते हैं तो रेंज 1000 मीटर है. अगर रॉकेट बूस्टेड लेजर गाइडेड हथियार दागते हैं तो 2000 मीटर तक गोला जाता है. (फोटोः SAAB)

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कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) में 10 तरह के हथियार लग सकते हैं. यानी एक ही वेपन सिस्टम से दुश्मन के ऊपर दस तरह के हथियार दागे जा सकते हैं. यानी एंटी पर्सनल HE और ADM, सपोर्ट वॉरहेड यानी Smoke, Illum, HEAT, एंटी ऑर्मर HEAT 551, 551C, 751. इसके अलावा मल्टी रोल एंटी स्ट्रक्चर वॉरहेड में ASM 509, MT 756, HEDP 502, 502 RS. इनका वजन 1.7 किलोग्राम तक हो सकता है. (फोटोः SAAB)

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भारत में बनाए गए SAAB कंपनी के कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) को उन जवानों को दिया जाएगा जो चीन की सीमा के पास LAC पर तैनात हैं. यानी चीन कभी भी क्लोज कॉम्बैट यानी नजदीकी लड़ाई की कोशिश नहीं कर पाएगा. गॉर्जेन जोहान्सन ने कहा कि सिर्फ हथियार नहीं बल्कि उसके हिस्सों का भी निर्माण करेंगे. (फोटोः विकिपीडिया)

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गॉर्जेन जोहान्सन ने बताया कि साब एफएफवी कंपनी का रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही है. हम भारत में अत्याधुनिक और स्टेट-ऑफ-द-आर्ट हथियार बनाएंगे. भारतीय सेना हमारे कार्ल गुस्ताफ एम3 का उपयोग कई बरसों से करती आ रही है. उसने नए वैरिएंट को भी मंगवाया है. लेकिन अब उन्हें भारत में ही बने हुए कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) रॉकेट लॉन्चर सिस्टम मिलेंगे. (फोटोः SAAB)

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कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) के भारत में बनने का फायदा ये होगा कि यहां के युवाओं को कंपनी में रोजगार मिलेगा. अगर किसी तरह की दिक्कत आती है तो हथियार को यहीं पर दुरुस्त कर दिया जाएगा. इसके लिए हथियारों को स्वीडन भेजने का खर्च बचेगा.  (फोटोः SAAB)

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भारतीय सेना कार्ल गुस्ताफ (Carl Gustaf) का उपयोग 1976 से करती आ रही है. क्योंकि यह दुनिया के चुनिंदा रॉकेट लॉन्चर्स में से है, जिसमें से कई प्रकार के हथियार दागे जा सकते हैं. साब भारत में 100 फीसदी FDI का सोच रही थी. लेकिन अब कंपनी 74 फीसदी FDI के साथ आ रही है. वह भारत में एक भारतीय कंपनी को अपना पार्टनर बनाएगी. कुछ कंपनियों के नाम साब ने फाइनल किए हैं. उनके साथ डील की जाएगी. (फोटोः SAAB)

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गॉर्जेन जोहान्सन ने बताया कि कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) की फैक्ट्री के लिए जगह फिलहाल तय नहीं है. लेकिन हमने कई जगहों को शॉर्टलिस्ट कर लिया है. बहुत जल्द ये भी फाइनल हो जाएगा कि फैक्ट्री कहां लगानी है. (फोटोः SAAB)

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भारतीय फैक्ट्री में बनने वाले हथियार यहां से पहले स्वीडन जाएंगे उसके बाद वहां से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजे जाएंगे. 
कार्ल गुस्ताफ एम4 (Carl Gustaf M4) के पैकेज में हथियार सिस्टम के साथ-साथ वॉरहेड और संबंधित ट्रेनिंग और सपोर्ट सिस्टम भी शामिल होगा. (फोटोः SAAB)