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सबसे खतरनाक डायनासोर के 'लेदर' से बना हैंडबैग होगा नीलाम, शुरुआती कीमत 4.63 करोड़

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:27 AM IST
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दुनिया के सबसे खतरनाक डायनासोर टी-रेक्स के जीवाश्म से निकाले गए कोलेजन प्रोटीन का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों ने एक अनोखा हैंडबैग बना लिया है. यह हैंडबैग गुरुवार को एम्स्टर्डम के आर्ट जू म्यूजियम में पेश किया गया. यह बैग हल्के नीले-हरे रंग का है. एक पिंजरे में एक चट्टान पर रखा गया है, जिसके ऊपर टी-रेक्स की नकल खड़ा है. Photo: Reuters

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11 मई तक यह प्रदर्शनी में रहेगा, उसके बाद इसे नीलामी में बेचा जाएगा.  शुरुआती कीमत 4.63 करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह प्रोजेक्ट लैब में उगाए गए चमड़े का इस्तेमाल दिखाने के लिए बनाया गया है. वैज्ञानिकों ने टी-रेक्स के जीवाश्मों से बहुत पुराने प्रोटीन के छोटे-छोटे टुकड़े निकाले. इन टुकड़ों को जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से एक अज्ञात जानवर की कोशिका में डाला गया. इससे कोलेजन प्रोटीन तैयार हुआ, जिसे बाद में चमड़े में बदल दिया गया. Photo: Reuters

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द ऑर्गेनॉइड कंपनी के सीईओ थॉमस मिशेल ने बताया कि इसमें बहुत सारी तकनीकी चुनौतियां आईं. तीन कंपनियां इस प्रोजेक्ट के पीछे हैं - ऑर्गेनॉइड, वीएमएल और लैब-ग्रोन लेदर लिमिटेड. लैब-ग्रोन लेदर लिमिटेड के सीईओ  चे कॉनन ने कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल चमड़ा नहीं है, बल्कि यह तकनीकी एडवांस है. इन तीनों कंपनियां 2023 में इन्होंने वूली मैमथ के डीएनए को भेड़ की कोशिकाओं में डालकर बड़ा मीटबॉल बनाया था. Photo: Reuters

 

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इस ‘टी-रेक्स लेदर’ को लेकर कुछ वैज्ञानिकों ने शक जताया है. नीदरलैंड की वेर्टीब्रेट पैलियोन्टोलॉजिस्ट मेलानी ड्यूरिंग कहती हैं कि डायनासोर की हड्डियों में कोलेजन सिर्फ छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में बचता है. इन टुकड़ों से टी-रेक्स की असली त्वचा या चमड़ा नहीं बनाया जा सकता. Photo: Reuters

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यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के पैलियोन्टोलॉजिस्ट थॉमस आर. होल्ट्ज जूनियर भी यही कहते हैं कि टी-रेक्स के जीवाश्मों में मिला कोलेजन हड्डी के अंदर से आता है, न कि त्वचा से. इसके अलावा, प्रोटीन भले ही मैच कर जाए, लेकिन असली चमड़े जैसी फाइबर की व्यवस्था नहीं बन पाती, जो चमड़े को मजबूत और खास बनाती है. Photo: Reuters

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थॉमस मिशेल ने इनका जवाब देते हुए कहा कि जब कोई नई चीज पहली बार की जाती है तो आलोचना तो आती ही है. उन्होंने कहा कि हमें इस आलोचना के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए क्योंकि यही वैज्ञानिक खोज की नींव है. फिर भी वे मानते हैं कि यह अब तक का सबसे करीबी प्रयास है जो टी-रेक्स जैसा कुछ बनाने के करीब पहुंचा होगा. Photo: Getty

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इस अनोखे हैंडबैग ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. प्रदर्शनी के बाद नीलामी में यह कितनी कीमत पर बिकेगा, यह देखना रोचक होगा. यह प्रोजेक्ट लैब-ग्रोन सामग्री के भविष्य को नई दिशा दे सकता है, भले ही वैज्ञानिक अभी भी इसमें कुछ कमियां बता रहे हों. Photo: Getty

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