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आकाशगंगा में चार दुश्मन Alien सभ्यताएं पर धरती का विनाश एस्टेरॉयड से होगा...नई स्टडी

aajtak.in
  • मैड्रिड,
  • 01 जून 2022,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST
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हमारी आकाशगंगा (The Milky Way) में रहने लायक कई ग्रह होंगे. इनमें से चार ग्रह ऐसे होंगे जहां पर एलियन सभ्यताएं रह रही होंगी. जो कि एकदूसरे की दुश्मन हो सकती हैं. ये एकदूसरे के ग्रहों पर हमला कर सकती हैं. रिसर्च को करने वाले साइंटिस्ट का दावा है कि एलियन धरती पर हमला करेंगे या नहीं ये कहना मुश्किल है. लेकिन धरती का विनाश एस्टेरॉयड के हमले से ही होगा. इस रिसर्च को प्रीप्रिंट डेटाबेस arXiv में प्रकाशित किया गया है. (फोटोः स्टीफन केलर/पिक्साबे)

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अभी तक इस स्टडी का पीयर रिव्यू नहीं हुआ है. जिसमें एक सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि अगर दुश्मन एलियन सभ्यता धरती पर हमला करती है तो क्या होगा? क्या कोई एलियन सभ्यता हमारी धरती पर हमला करने लायक है भी या नहीं? इन सवालों का जवाब खोजने की कोशिश की है स्पेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ विगो के डॉक्टोरल स्टूडेंट इन कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन अलबर्टो कैबारेलो ने. (फोटोः मिलेनियम फॉल्कन/पिक्साबे)
 

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अलबर्टो कहते हैं कि मेरी स्टडी इस बात का अंदाजा लगाती है कि क्या एलियन हमारी धरती पर हमला करेंगे. क्या ये हमारे दुश्मन होंगे. क्या किसी रहने लायक ग्रह के लोगों या इंसानों के बीच युद्ध की नौबत आएगी. हो सकता है कि ऐसे एलियंस हों जो दोस्ती के बजाय दुश्मनी में भरोसा रखते हों. अलबर्टो एस्ट्रोफिजिसिस्ट नहीं है, लेकिन इससे पहले भी वो अनजान सिग्नलों के बारे में रिसर्च पेपर लिख चुके हैं. (फोटोः विलगार्ड क्रॉस/पिक्साबे)

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अलबर्टो ने सबसे पहले यह पता किया कि किस देश ने किस देश पर हमला किया. साल 1915 से 2022 तक दुनिया 195 देशों में से 51 देशों ने किसी न किसी प्रकार का हमला दूसरे देशों पर किया. इस लिस्ट में अमेरिका टॉप पर है. उसने इस समय में 14 हमले किये. इसके बाद अलबर्टो ने उस देश की मिलिट्री ताकत और हमले की फ्रिक्वेंसी को जांचा. इसमें भी अमेरिका नंबर एक पर आया. वह पूरी दुनिया के मिलिट्री खर्च का 38 फीसदी खर्च करता है. (फोटोः स्टीफन केलर/पिक्साबे)

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अलबर्टो ने देखा कि 1915 से 2022 तक जितने हमले एक दूसरे पर धरती के देशों ने किये है. उन्हें देखकर लगता है कि एलियंस खुद धरती पर हमला करेंगे. क्योंकि इंसान किसी एलियन सभ्यता पर हमला करे इसकी संभावना 0.028 फीसदी है. क्योंकि इंसान अब भी अंतरिक्ष में लंबी यात्राएं करने में सक्षम नहीं है. अभी तो तकनीक है इसके हिसाब से लगता है कि इंसान को तेजी से अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए 259 साल लगेंगे. यह गणना इंसान के ऊर्जा खपत पर आधारित है. जिसे उन्होंने कार्दाशेव स्केल पर गणना करके बताया है. (फोटोः स्टीफन केलर/पिक्साबे)

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अलबर्टो ने यह भी कहा कि इंसान कभी भी अंतरिक्ष में किसी अन्य एलियन सभ्यता या ग्रह पर हमला नहीं कर पाएगा. क्योंकि हमें टाइप-1 यानी इंटरस्टेलर बनने में अभी 259 साल लगेंगे. हमारी आकाशगंगा में कई रहने लायक ग्रह हो सकते हैं. हो सकता है कि उनपर कोई सभ्यता भी रह रही हो. साल 2012 में एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि हमारी आकाशगंगा में 15,785 एलियन सभ्यताएं हैं, जो इंसानों के साथ संपर्क साधना चाहती हैं. (फोटोः यूरी बी/पिक्साबे)

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अलबर्टो ने इन 15,785 एलियन सभ्यताओं में से सिर्फ 0.22 एलियन सभ्यताओं को ही टाइप-1 पाया. यानी जो सुदूर अंतरिक्ष की यात्रा कर सकती हैं. ये इंसानों की दुश्मन हो सकती हैं. यानी हमारी आकाशगंगा में 4.42 एलियन पड़ोसी हैं, जो हमसे दुश्मनी रखते हैं या रख सकते हैं. इसी के आधार पर वो हमपर हमला करेंगे. (फोटोः स्टीफन केलर/पिक्साबे)

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अलबर्टो ने इन 15,785 एलियन सभ्यताओं में से सिर्फ 0.22 एलियन सभ्यताओं को ही टाइप-1 पाया. यानी जो सुदूर अंतरिक्ष की यात्रा कर सकती हैं. ये इंसानों की दुश्मन हो सकती हैं. यानी हमारी आकाशगंगा में 4.42 एलियन पड़ोसी हैं, जो हमसे दुश्मनी रखते हैं या रख सकते हैं. इसी के आधार पर वो हमपर हमला करेंगे. (फोटोः डैनियेला रियले/पिक्साबे)

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इंसान की धरती का विनाश तो एस्टेरॉयड के हमले से होने की आशंका ज्यादा है. क्योंकि हर 10 करोड़ साल में एक बार ऐसा एस्टेरॉयड धरती से जरूर टकराएगा, जैसा डायनासोर के समय टकराया था. इसलिए धरती से इंसानों को खत्म करने की क्षमता और ताकत फिलहाल तो ऐसे किसी एस्टेरॉयड के पास ही है. (फोटोः रीमंड बर्ट्रैम्स/पिक्साबे)