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मौत का दूसरा नाम है AK, इस राइफल ने अब तक दुनिया में कितनी जान ली?

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 7:49 PM IST
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जिस साल अपना देश आजाद हुआ, उसी साल रूस में मिखाइल कलाश्निकोव की AK-47 राइफल की पहला मिलिट्री ट्रायल हुआ. रूस की सेना में शामिल करने का आदेश दिया गया. वहीं, अमेरिका में इस बंदूक को 'दुश्मन का हथियार' कहा और माना जाता है. इसके बावजूद अमेरिकी बंदूक प्रेमी और सैनिक इसे बहुत पसंद करते हैं. शायद यही वजह है कि हर सेना इस बंदूक को चाहती है. (फोटोः गेटी)

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दुनिया के करीब 106 देशों में AK-47 असॉल्ट राइफल स्टैंडर्ड इन्फैन्ट्री हथियार के तौर पर प्रयोग की जाती है. अनुमान है कि AK सीरीज (सभी वैरिएंट्स) के 10 करोड़ राइफल्स दुनिया में हैं. इसके सभी वैरिएंट्स बंदूक प्रेमियों, सैनिकों, विद्रोहियों और आंतकियों के बीच बहुत पसंद की जाती है. हालांकि अमेरिका में AK सीरीज की राइफल को 'बुरे आदमी' का हथियार कहते हैं. कह भी सकते हैं क्योंकि अमेरिका का अनुभव इस राइफल के साथ बुरा ही रहा है. (फोटोः विकिपीडिया)

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AK-47 का पूरा नाम? (Full Form of AK-47)

AK का पूरा नाम रूसी भाषा में एवतोमैत कलाश्निकोव (Avtomat Kalashnikov) है. सामान्य भाषा में इसे कलाश्निकोव बुलाया जाता है. इसका नाम इसे बनाने वाले सीनियर सार्जेंट मिखाइल कलाश्निकोव पर है. द्वितीय विश्व युद्ध के समय वो टैंक कमांडर थे. जो घायल हो गए थे. उन्हें जर्मन हथियार और उनकी डिजाइन बहुत पसंद आती थी. वो खुद ऐसी राइफल बनाना चाहते थे, जो बिना फंसे लगातार किसी भी मौसम और जगह पर गोलियां बरसा सके. पांच साल इंजीनियरिंग करने के बाद पूर्व कृषि इंजीनियर मिखाइल कलाश्निकोव ने AK-47 बनाई. 

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क्या AK जर्मन राइफल की नकल थी (AK is copy of German Rifle)

मिखाइल पर यह आरोप भी लगता है कि उन्होंने जर्मन राइफल StG-44 के डिजाइन की नकल की थी. यह राइफल पहली मिड-रेंज इन्फैन्ट्री राइफल थी. यह बहुत ज्यादा फायरिंग नहीं करती थी, लेकिन दमदार थी. चुंकि AK-47 भी यही काम करती थी, इसलिए इसे StG-44 का नकल कहा जाने लगा. लेकिन AK-47 की सिंप्लीसिटी ही उसकी सबसे बड़ी खासियत थी. आसानी से रिपेयर हो जाती थी. आसानी से जाममुक्त हो जाती थी. मेंटेनेंस आसान है. (फोटोः रॉयटर्स)

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क्या AK-47 राइफल्स अवैध हैं? (Are AK-47 Illegal)

बड़ी साफ सी बात है कि आप इस स्टोरी को किस देश में पढ़ रहे हैं. उस देश के कानून के हिसाब से एके-47 की वैधता तय होती है. कई देशों में तो यह गन वैध ही नहीं, बल्कि इसे रखना जरूरी माना जाता है. इसके घर पर आने पर खुशियां मनाई जाती हैं. एके-47 राइफल्स दुनिया के कई देशों में बिकती हैं, वो भी बेहद सस्ती कीमत पर. (फोटोः विकिपीडिया)
 

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कितनी कीमत है AK-47 की? (Cost of AK-47)

ट्रांजिशनल क्राइम इन डेवलपिंग वर्ल्ड नाम की स्टडी के मुताबिक पाकिस्तान के ब्लैक मार्केट में यह राइफल 150 डॉलर्स यानी 11,471 रुपये में मिल जाती है. वहीं अमेरिका में डार्क वेब के जरिए आप इसे 3600 डॉलर्स यानी 2.75 लाख रुपये से ज्यादा देकर खरीद सकते हैं. मतलब देश और पसंद के मुताबिक कीमत. अफ्रीका के कई देशों में इसकी कीमत काफी कम हो जाती है, क्योंकि यह वहां की सेना और विद्रोही समूहों में काफी ज्यादा पसंद की जाती है. वहां का बाजार इस राइफल से भरा पड़ा है. (फोटोः पिक्साबे)

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AK-47 कितनी गोलियां दाग सकता (How many bullets AK-47 fire)

एके-47 पूरी तरह से ऑटोमैटिक सेंटिंग के अंदर 600 राउंड गोली फायर कर सकता है. इसमें 7.62x39 mm की गोलियां भरी जाती हैं. सेमी-ऑटो मोड में 40 राउंड प्रति मिनट और बर्स्ट मोड में 100 राउंड प्रति मिनट निकलती है. आमतौर पर इसकी रेंज (Range) 350 मीटर है. गोली 715 मीटर प्रति मिनट की दर से टारगेट की ओर बढ़ती है. इसकी मैगजीन तीन तरह की आती हैं. 20 राउंड, 30 राउंड की और 75 राउंड की ड्रम मैगजीन. (फोटोः पिक्साबे)
 

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क्या हम भारत में वैध तरीके से AK खरीद सकते हैं (Can We legally buy AK-47 In India)

अगर आप अमेरिका में हैं तो यह निर्भर करता है कि आप किस राज्य में हैं. उसके नियमों के मुताबिक ही राइफल मिलेगी. लेकिन भारत में आपको यह बंदूक वैध तरीके से नहीं मिल सकती. यह सिर्फ सेना, पैरामिलिट्री फोर्स, पुलिस, एसटीएफ आदि को ही मिलती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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कितनी खतरनाक है AK-47 राइफल (How Deadly is AK-47)

अगर पूरी दुनिया में सबसे खतरनाक और घातक राइफल अब तक कोई बनी है, तो वो है AK-47. इसकी 300-350 मीटर की रेज में आने वाला दुश्मन सीधे यमराज के पास चला जाता है. शुरुआती राइफल बेहद भारी थी. निशाना भी बहुत सही नहीं था. लेकिन धीरे-धीरे मिखाइल कलाश्निकोव ने इसे सुधार दिया. उस जमाने का AK आज AKM (Modernized) हो गया है. अब एकेएम आते हैं. कहा जाता है कि इसकी वजह से हर साल 2.50 लाख लोग मारे जाते हैं. (फोटोः पिक्साबे)

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आतंकी क्यों चलाते हैं AK-47 (Why terrorists use AK-47s)

अगर किसी को राइफल चलानी है या जरूरी तौर पर रखनी है, तो पहली काबिलियत होनी चाहिए कि आप उसे चलाने के लिए वैध इंसान हो. प्रोफेशनल हो. यानी ट्रेंड सैनिक या पुलिसकर्मी. या फिर आतंक फैलाने वाले आतंकी. जो घटिया तरीके से बंदूकों को चलाने की ट्रेनिंग लेते हैं. उनका गलत उपयोग करते हैं. दुनिया भर में इस राइफल की कालाबाजारी होती है. आसानी से कम कीमत पर मिल जाती है. भरोसेमंद और सटीक फायरपावर होने की वजह से आतंकी इसे हासिल करना चाहते हैं. हर मौसम में पूरी ताकत के साथ चलती है. गर्मी हो, बर्फीला इलाका हो या ह्यूमिडिटी वाला. (फोटोः विकिपीडिया)

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भारत के पास कितनी AK राइफल्स (How many AK Rifles in India)

भारत की सेनाओं के पास AK-47 या AK-56 कितनी है, इसका सटीक आंकड़ा आधिकारिक तौर पर कहीं नहीं है. लेकिन भारत और रूस के बीच अत्याधुनिक AK-203 बनाने का समझौता हुआ है. जिसके तहत 7.50 लाख AK-203 राइफल्स बनाई जाएंगी. जो सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेस आदि को दी जाएंगी. इसे उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बनाया जाएगा. (फोटोः विकिपीडिया)

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कौन सी बेहतर... INSAS vs AK-47 vs AK-203

इंसास राइफल पुरानी हो चुकी हैं. भरोसेमंद हैं लेकिन बेहद वजनी. फायर पावर और रेंज भी एके-203 की तुलना में कमजोर है. साथ ही उसमें ऑटोमैटिक फायरिंग मोड नहीं है. अब अगर बात करें कि AK-47 बेहतर है या AK-203. तो एके-47 की तुलना में एके-203 हल्की है. 47 खाली मैगजीन के साथ 4.3 किलोग्राम की है. जबकि, 203 सिर्फ 3.8 किलोग्राम की है. एके-203 की साइटिंग रेंज 800 मीटर है, जबकि 47 की 300-400 मीटर है. (फोटोः विकिपीडिया)

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AK सीरीज में कितने वैरिएंट्स (Variants of AK Series Rifles)

AK सीरीज के फिलहाल दुनिया में 17 वैरिएंट्स अलग-अलग देशों, सैन्य समूहों, विद्रोहियों और आतंकियों के बीच उपयोग में लाए जा रहे हैं. ये हैं- AK-47, AKM, AK-74, AK-74M, AK-101, AK-102, AK-103, AK-104, AK-105, AK-12, AK-12K, AK-15, AK-15K, AK-200, AK-205, AK-203 और AK-19. ये सभी राइफल्स अपने बनने के वर्ष के क्रम में है. आखिरी वाली सबसे लेटेस्ट राइफल है. 
 

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