Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर आज करें शिव जी की आरती, जीवन के हर कष्ट होंगे दूर

Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र पर्वों में से एक है. इस विशेष अवसर पर भक्त व्रत रखकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं और 'ऊं जय शिव ओंकारा' आरती का पाठ करते हैं. यहां पढ़ें शिवजी की सम्पूर्ण आरती और कर्पूरगौरं करुणावतारं मंत्र हिंदी में.

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महाशिवरात्रि पर पढ़ें ये आरती (Photo: ITG) महाशिवरात्रि पर पढ़ें ये आरती (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST

Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान शिव को समर्पित किया जाता है. यह उत्सव फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण आयोजित किए जाते हैं. मान्यता है कि इसी पावन रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. भक्त व्रत रखकर, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं. इस दिन भक्त भगवान शिव की कृपादृष्टि पाने के लिए उनकी आरती भी करते हैं. तो आइए पढ़ते हैं उनकी आरती. 

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शिवजी का मंत्र 

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं| सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि॥ 
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ 

शिवजी की आरती 

ॐ जय शिव ओंकारा.... 
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे| 
हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ 

ॐ जय शिव ओंकारा... 
दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें| तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ 

ॐ जय शिव ओंकारा... 
अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी| 
चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी॥ 

ॐ जय शिव ओंकारा.... 
श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें| 
सनकादिक, ब्रम्हादिक, भूतादिक संगें|| 

ॐ जय शिव ओंकारा... 
कर के मध्य कमड़ंल चक्र, त्रिशूल धरता| जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥ 

ॐ जय शिव ओंकारा... 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका| प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका॥ 

ॐ जय शिव ओंकारा... 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी| 
नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी॥ 

ॐ जय शिव ओंकारा... 
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें| कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें॥ 

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ॐ जय शिव ओंकारा... जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ 
ॐ जय शिव ओंकारा.

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