जानें महाशि‍वरात्रि पर रात्रि पूजन का महत्व...

महाशिवरात्रि के दिन रात्रि पूजन का विशेष महत्व है. ज्योतिषाचार्यों की मानें तो महाशि‍वरात्रि के दिन रात्रि पूजन दिन में की गई पूजा के मुकाबले कहीं ज्यादा फल देता है. जानिये कैसे करें रात की पूजा और क्या होते हैं लाभ...

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रात्रि में करें माशि‍वरात्रि पर पूजन रात्रि में करें माशि‍वरात्रि पर पूजन

ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को आधी रात के समय महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, कई ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि इसी दिन रात्रि में शिवजी का विवाह मां गौरा के साथ विधिविधान से हुआ था. इसलिए दुनियाभर में महाशिवरात्रि की पूरी रात चार प्रहर की पूजा की जाती है.


पूजा का विधान
- महाशिवरात्री के दिन व्रत रखें
- रात्रि के चार प्रहर रुद्राभिषेक करें
- सुबह हवन करें
- हवन के बाद ब्राह्मण और गरीब को भोजन कराएं, फल, मिठाई, वस्त्र, अनाज दान करें
- इसके बाद व्रत का पारायण करें

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रुद्राभिषेक में किन सामग्रियों का प्रयोग अवश्य करें
सामग्री
- जल
- शहद
- दूध
- दही
- घी

- इत्र
- गुलाल, अबीर
- गन्ने का रस
- चीनी
- जनेऊ
- धतूरे का फूल, फल
- बेलपत्र

चार प्रहर पूजा का मुहूर्त
- पहले प्रहर की पूजा- शाम 07:42 से 09:40 बजे तक
- दूसरे प्रहर की पूजा- रात 10:00 से 12:50 बजे तक
- तीसरे प्रहर की पूजा- रात 1:20 से 03:50 बजे तक
- चौथे प्रहर की पूजा- रात 04:10 से सुबह 05:30 बजे तक

चार प्रहर पूजा से मनोकाना होती है पूरी
महाशिवरात्री की रात में चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से, विधिविधान से रुद्राभिषेक करने भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और मनोकामना पूरी करते हैं.

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