23 जुलाई को रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत, जानें इस त्योहार की कथा

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां पार्वती ने भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्राप्त किया था. वृक्ष,नदी और जल के देवता वरुण की भी उपासना इस दिन की जाती है.

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हरियाली तीज का व्रत मुख्य रूप से मनचाहे वर की प्राप्ति का है. हरियाली तीज का व्रत मुख्य रूप से मनचाहे वर की प्राप्ति का है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST

श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए तीज का त्योहार मनाया जाता है. श्रावण में जब चारों तरफ हरियाली होती है तभी इस त्योहार को मनाने की परंपरा है. माना जाता है कि इसी दिन मां पार्वती ने भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्राप्त किया था. वृक्ष,नदी और जल के देवता वरुण की भी उपासना इस दिन की जाती है.

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मुख्य रूप से यह त्योहार मनचाहे वर की प्राप्ति का है. अतः जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो पा रहा हो उनके लिए इस व्रत और पूजा उपासना का विशेष महत्व है. जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है, उनको संयुक्त रूप से भगवान शिव और पार्वती की उपासना करनी चाहिए. इस बार हरियाली तीज का त्यौहार 23 जुलाई को मनाया जाएगा.

हरियाली तीज व्रत कथा

हरियाली तीज का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी. इस तपस्या के बाद ही उन्होंने भोलेनाथ को पति के रूप में हासिल किया था.

हिमालय के घर पुनर्जन्म लेने वाली माता पार्वती बचपन से ही शिव को पति के रूप में पाना चाहती थीं. एक दिन नारद मुनी हिमालय से मिले और बोले कि विष्णु जी पार्वती से विवाह करना चाहते हैं. हिमालय उनके प्रस्ताव से बहुत प्रसन्न हुए. इसके बाद नारद मुनि विष्णुजी के पास पहुंचे और कहा कि हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे कराने का वचन दिया है.

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इसके बाद नारद माता पार्वती से मिले और उन्हें बताया कि पिता हिमालय ने उनका विवाह विष्णु से तय कर दिया है. यह सुनकर पार्वती बहुत निराश हुईं और किसी एकांत स्थान पर चली गईं. यहां घने और सुनसान जंगल में पहुंचकर माता पार्वती ने तपस्या शुरू की. उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाया और व्रत किया.

माता पार्वती की इस तपस्या से शिव शंकर काफी प्रसन्न हुए और उनकी इच्छा पूरी करने का वरदान दिया. जब पर्वतराज को इस बारे में पता चला तो वे खुशी-खुशी माता पार्वती का विवाह भगवान शिव से कराने को तैयार हो गए. आखिरकार दोनों का विवाह संपन्न हुआ और तभी से हरियाली तीज के त्योहार का प्रचलन चला आ रहा है.

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