Vastu Upay: हर घर में दिशाओं का खास महत्व होता है, लेकिन वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे अधिक पवित्र माना गया है. यह स्थान सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है. इसलिए इस दिशा में क्या रखना चाहिए और क्या नहीं, इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. छोटी-सी गलती भी घर के माहौल पर असर डाल सकती है.
ईशान कोण का महत्व
घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, वास्तु शास्त्र में सबसे पवित्र मानी जाती है. इसे भगवान का स्थान भी माना जाता है. कहा जाता है कि इसी दिशा से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है, जिससे सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. इसलिए इस हिस्से को हमेशा साफ, खुला और हल्का रखना जरूरी होता है.
टॉयलेट या बाथरूम से करें परहेज
ईशान कोण में कभी भी टॉयलेट या बाथरूम नहीं होना चाहिए. ऐसा होने पर घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है. इसका असर मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी और पारिवारिक अशांति के रूप में दिखाई दे सकता है.
भारी सामान न रखें
इस दिशा में भारी फर्नीचर, अलमारी या स्टोर रूम बनाना भी ठीक नहीं माना जाता. इससे ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे जीवन में रुकावटें और तरक्की में बाधा आ सकती है.
किचन के लिए सही नहीं है यह दिशा
ईशान कोण में किचन बनाना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता. रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा बेहतर होती है. अगर इस दिशा में किचन हो, तो घर में विवाद और असंतुलन की स्थिति बन सकती है.
गंदगी और कबाड़ से बचें
इस जगह पर कूड़ा-करकट या बेकार सामान रखने से बचना चाहिए. गंदगी होने से सकारात्मक ऊर्जा कम हो जाती है और नकारात्मकता बढ़ने लगती है. इसलिए इस कोने को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी है.
बेडरूम बनाने से बचें
ईशान कोण में शयनकक्ष बनाना भी सही नहीं माना जाता, खासकर शादीशुदा लोगों के लिए. इससे रिश्तों में तनाव और मानसिक अशांति बढ़ सकती है.
पूजा या ध्यान के लिए सबसे अच्छा स्थान
यह दिशा पूजा-पाठ, ध्यान या आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यहां मंदिर या ध्यान का स्थान बनाने से घर में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है.
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