मेष संक्रांति पर करें दान, मिलेगा शुभ फल

सूर्य का राशि परिवर्तन करना संक्रांति कहलाता है और इस दिन को स्नान-दान-तर्पण आदि के लिये बहुत शुभ माना जाता है. मेष राशि में सूर्य का आना तो और भी शुभ होता है क्योंकि यह दिन सौर वर्ष का पहला दिन होता है. यानि सौर वर्ष का आरंभ मेष संक्राति के साथ होता है.

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मेष संक्रांति 2018 मेष संक्रांति 2018

प्रज्ञा बाजपेयी

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 10:14 AM IST

सूर्य का राशि परिवर्तन करना संक्रांति कहलाता है और इस दिन को स्नान-दान-तर्पण आदि के लिये बहुत शुभ माना जाता है. मेष राशि में सूर्य का आना तो और भी शुभ होता है क्योंकि यह दिन सौर वर्ष का पहला दिन होता है. यानि सौर वर्ष का आरंभ मेष संक्राति के साथ होता है. मेष संक्रांति के महत्व और स्नान-दान के बारे में जानकारी दे रहे हैं श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के न्यास परिषद सदस्य पंडित प्रसाद दीक्षित-

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जब सूर्य मीन राशि से मेष राशि में संक्रमण करते हैं तब यह काल मेष संक्रांति कहलाता है और तब से सौर वैशाख मास की प्रवृत्ति होती है.  इसी संक्रांति को भगवान सूर्य उत्तरायण की आधी यात्रा पूर्ण करते हैं. भारत के अलग-अलग राज्यों में मेष संक्रांति को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. बिहार में सतुआनी, ओडिशा में पना संक्रांति, तमिलनाडु में पुथांदु, पश्चिम बंगाल में पोइला बैसाख, आसाम में बोहाग बिहू, पंजाब में वैशाख, केरल में विशु के नाम से जाना जाता है. बंगाल वासी इसे नव वर्ष के रूप में मनाते हैं . इस संक्रांति को धर्मघट का दान, स्नान, तिल द्वारा पितरों का तर्पण तथा मधुसूदन भगवान की पूजन का विशेष महत्व है.

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पद्मपुराण में इसकी विस्तृत जानकारी भी दी गई है. मेष की संक्रांति में 10 घड़ी पहले से 10 घड़ी बाद आठ घंटों का पुण्यकाल रहता है. 15 घड़ी पूर्व तथा 15 घंटे बाद का पुण्यकाल भी बताया गया है . यदि रात्रि में सूर्य की संक्रांति हो तो  दिन के आधे में स्नान और दान कहां गया है . वशिष्ठ जी के वचन से रात में सूर्य की संक्रांति होने पर दिन में उनकी क्रिया करें. विष्णुस्मृति में मेष संक्रांति पर प्रातः स्नान महापातक का नाश करने वाला बताया गया है . इस वर्ष मेष संक्रांति का पुण्यकाल प्रातः 6:03 से दिन में 2:03 तक रहेगा. इस काल में मेष संक्रांति का दान इत्यादि का सभी कार्य पूर्ण करना श्रेयस्कर रहेगा.

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