कोरोना वायरस महामारी की वजह से कई मंदिरों में भक्तों के लिए ई-दर्शन की व्यवस्था की जा रही है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि मंदिर में ई-दर्शन, दर्शन करना नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम टिप्पणी झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर को लेकर की है.
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भक्तों को अब तक केवल ई-दर्शन के जरिए दर्शन करने की इजाजत है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि कोरोना संकट काल में भीड़ न लगे, इसके लिए भक्तों के लिए मंदिर में सीमित संख्या में दर्शन करने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को श्रावणी मेला के लिए अनुमति नहीं दी थी. ये मेला बैद्यनाथ मंदिर में हर साल आयोजित किया जाता है. बीजेपी सांसद ने बासुकीनाथ मंदिर को भी दर्शन के लिए खोलने की अपील की थी. बीजेपी सांसद निशीकांत दुबे ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि ई-दर्शन को दर्शन नहीं कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि सीमित संख्या में और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का सख्ती से पालन कराते हुए लोगों को मंदिर में दर्शन करने की इजाजत दी जा सकती है. झारखंड की सरकार कुछ घंटों में अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट को देगी.
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