चाणक्य नीति: इन 4 स्थितियों में गलती करने वाले की बजाय दूसरों को मिलती है 'सजा'

Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति के छठे अध्याय के 10वें श्लोक में आचार्य चाणक्य ने उन परिस्थितियों के बारे में बताया है, जिसमें व्यक्ति दूसरों के कारण मुसीबत में पड़ता है और उसे बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ता है.

Advertisement
Chanakya Niti In Hindi (चाणक्य नीति) Chanakya Niti In Hindi (चाणक्य नीति)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2020,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

बालक चंद्रगुप्त मौर्य को अखंड भारत का सम्राट बनाने वाले आचार्य चाणक्य को महान रणनीतिकारों में शामिल किया जाता है. उनकी नीतियों का अनुसरण कर मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है और दैनिक जीवन की परेशानियों से भी निजात पा सकता है. चाणक्य नीति के छठे अध्याय के 10वें श्लोक में आचार्य चाणक्य ने उन परिस्थितियों के बारे में बताया है, जिसमें व्यक्ति दूसरों के कारण मुसीबत में पड़ता है और उसे बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ता है...

Advertisement

राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञ: पापं पुरोहित:।

भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्यपापं गुरुस्तथा।।

इस श्लोक में चाणक्य चार प्रकार की परिस्थितियों का जिक्र करते हैं. सबसे पहले वो कहते हैं कि किसी भी देश की जनता सामूहिक रूप से कोई गलत काम करती है तो उसका परिणाम राजा या शासन को भोगना पड़ता है. इसलिए राजा का यह कर्तव्य है कि वो जनता पर नजर रखे ताकि वो कुछ भी गलत न कर पाए.

चाणक्य नीति: अगर आपके पास हैं ये तीन चीजें तो धरती पर ही मिल सकता है स्वर्ग जैसा सुख

ऐसे ही अगर सरकार के मंत्री या सलाहकार अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाते हैं और राजा तक सही जानकारी नहीं पहुंचाते हैं तो राजा गलत निर्णय लेता है. ऐसी स्थिति में राजा और उसके पूरे मंत्री परिषद को नुकसान उठाना पड़ता है. जबकि जवाबदेह राजा का सलाहकार, मंत्री या फिर पुरोहित होता है.

Advertisement

चाणक्य नीति: जिस व्यक्ति के अंदर होती है ये एक आदत, उसके बिगड़ जाते हैं सारे काम

चाणक्य कहते हैं कि पति के गलत कार्यों से पत्नी परेशान होती है और पत्नी के गलत कामों की सजा पति को मिलती है. परेशानियों से बचने के लिए दोनों को एक दूसरे का ख्याल रखना चाहिए.

चाणक्य नीति: इन 5 लोगों के पास कभी नहीं रुकता पैसा, बचाने के लिए करें ये उपाय

आचार्य अंत में कहते हैं कि शिष्य के गलत कर्मों का बुरा फल उसके गुरु को मिलता है. ऐसे में गुरु की ये जिम्मेदारी है कि वो अपने शिष्य को किसी भी गलत रास्ते पर जाने से रोकें. शिष्य के रास्ता भटकने पर उसका जिम्मेदार गुरु ही होता है.

ये भी पढ़ें...

चाणक्य नीति: संसार में घूमने पर पूजे जाते हैं ये 3 लोग, भ्रमण करती स्त्री हो जाती है बदनाम

चाणक्य नीति: एक नहीं, हर व्यक्ति के होते हैं 5 पिता, जानिए कैसे

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement