सिर्फ क्रोध, संहार और विनाश नहीं… मां काली के हैं 12 स्वरूप, जिनमें छिपा है जीवन का रहस्य

नवरात्रि के सातवें दिन देवी काली की पूजा विशेष महत्व रखती है। देवी काली के 12 स्वरूप हैं, जिनमें आद्या काली, मातंगी काली, छिन्नमस्ता काली, श्मशान काली, बगला काली, दक्षिणा काली, भैरवी काली, तारा काली, षोडशी काली, कमला काली, गुह्य काली और धूमावती काली शामिल हैं.

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नवरात्रि का सातवां दिन देवी काली की पूजा के लिए निर्धारित होता है नवरात्रि का सातवां दिन देवी काली की पूजा के लिए निर्धारित होता है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:40 AM IST

नवरात्रि का सातवां दिन देवी काली की पूजा के लिए निर्धारित है. इस दिन की शक्ति को मां कालरात्रि कहा जाता है. देवी और भगवती परंपरा में भले ही देवी काली सातवें नंबर पर आती हैं, लेकिन असल में सभी महाविद्याओं में उनका स्थान पहला है. बल्कि काली ही मुख्य देवी शक्ति हैं. लेकिन अपने उग्र स्वरूप के कारण अक्सर गलत समझ ली जाती हैं या फिर बहुत गुस्सैल और बहुत विनाशक. लेकिन मां काली केवल संहार की देवी नहीं हैं. काली समय, शक्ति, जीवन और मृत्यु, इन सभी तत्वों की प्रतीक हैं. सामान्य तौर पर हम देवी काली के सिर्फ एक ही रूप, नाम और स्वरूप को जानते हैं.

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असल में देवी काली के 12 स्वरूप हैं और इनमें से हर एक का अपना विशेष महत्व और प्रतीकात्मक अर्थ है.

देवी काली के 12 स्वरूप

1. आद्या काली

आद्या काली, दशमहाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं. विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इनकी पूजा अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है. वे आदिशक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं और हिंदू धर्म में परम दिव्यता का स्वरूप मानी जाती हैं. आद्या काली को दुर्गा, पार्वती और काली के अन्य रूपों से जोड़ा जाता है, जो देवी के विभिन्न स्वरूपों की एकता को दर्शाता है.

2. मातंगी काली

मातंगी काली को सरस्वती का उग्र रूप माना जाता है. इनकी पूजा सामान्य परंपराओं से अलग होती है और इन्हें बासी भोजन का भोग भी लगाया जाता है. चांडालिनी नाम से प्रसिद्ध यह स्वरूप तांत्रिक साधनाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है और सामान्यतः घरों में इनकी पूजा नहीं की जाती.

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3. छिन्नमस्ता काली

यह स्वरूप अत्यंत विचित्र और रहस्यमय है, जिसमें देवी स्वयं अपना सिर काटे हुए दिखाई देती हैं और उनके रक्त का पान उनका कटा हुआ सिर करता है. छिन्नमस्ता काली जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक हैं, जो सृजन और विनाश दोनों को दर्शाती हैं.

4. श्मशान काली

श्मशान काली का संबंध श्मशान भूमि से है और इनकी पूजा वहीं की जाती है. इनका स्वरूप अन्य रूपों से भिन्न होता है, इनके केवल दो हाथ होते हैं और जीभ बाहर नहीं निकली होती, जिससे यह अधिक मानवीय प्रतीत होती हैं.

5. बगला काली या बगला मुखी
बगला काली अत्यंत उग्र स्वरूप हैं, लेकिन उनकी सुंदरता भी अद्वितीय मानी जाती है. उन्हें राक्षसों की जीभ पकड़ते या खींचते हुए दिखाया जाता है. यह स्वरूप देवी की उस शक्ति को दर्शाता है जो सृजन और विनाश दोनों में सक्षम है. देवी वाणी की शक्ति देती हैं और वाणी पर नियंत्रण भी करती हैं.

6. दक्षिणा काली

दक्षिणा काली बंगाल में सबसे लोकप्रिय स्वरूप हैं. इन्हें करुणामयी माता माना जाता है, जो अपने भक्तों को दुर्घटनाओं और संकटों से बचाती हैं. मान्यता है कि यमराज भी इनके नाम से भयभीत रहते हैं, जो इनके जीवन-मृत्यु पर अधिकार को दर्शाता है.

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7. भैरवी काली

भैरवी काली को मृत्यु की सूचक माना जाता है, लेकिन वे एक संरक्षक मां का रूप भी हैं. त्रिपुरा में इनका प्रमुख मंदिर स्थित है, जिससे इस स्वरूप का क्षेत्रीय महत्व भी जुड़ता है.

8. तारा काली

तारा काली का रंग हल्का नीला होता है और उन्हें बाघ की खाल धारण किए हुए दिखाया जाता है. यह स्वरूप देवी के उग्र लेकिन संरक्षण देने वाले रूप को दर्शाता है. यह देवी शिव को बाल रूप में दूध पिलाते भी नजर आती हैं. आकाश के तारों में इन्हीं तारा देवी की शक्ति है.

9. षोडशी काली

षोडशी काली को एक युवा और आकर्षक स्वरूप में दर्शाया जाता है, जो मासूमियत से परिपक्वता की ओर बढ़ती हैं. यह स्वरूप आध्यात्मिक परिवर्तन और ज्ञान की ओर ले जाने वाली शक्ति का प्रतीक है. देवी का स्वरूप 16 वर्षीय किशोरी का है और अधिक ममता मयी है. सीता, द्रौपदी, तारा, लक्ष्मी, राधा सभी सौम्य छवियों वाली देवियां इसी षोडशी काली का ही अंश मानी जाती हैं.

10. कमला काली

कमला काली, लक्ष्मी का ही एक स्वरूप मानी जाती हैं, जो धन और समृद्धि की देवी हैं. देवी भागवत और देवी रहस्य को मानें तो कमला काली ही लक्ष्मी का अवतार हैं. यह सभी निधियों और सिद्धियों की देवी हैं. इन्हें अक्सर दो हाथियों के साथ दर्शाया जाता है, जो उनकी भव्यता और ऐश्वर्य का प्रतीक है. इनके भैरव का नाम विष्णु हैं जो खुद नारायण के स्वरूप हैं. इस लिहाज से देखें तो भगवान विष्णु भी एक भैरव ही हैं.

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11. गुह्य काली

गुह्य काली गुप्त और रहस्यमयी स्त्री शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं और तांत्रिक साधनाओं में इनका विशेष महत्व है. इन्हें कालेस्वरी भी कहा जाता है और कलेश्वर की पत्नी माना जाता है.

12. धूमावती काली

धूमावती काली हिंदू धर्म में एकमात्र ऐसी देवी हैं जिन्हें विधवा रूप में दर्शाया गया है. उन्हें 'धूम्र देवी' भी कहा जाता है और वे जीवन के अंधकारमय पक्षों का प्रतिनिधित्व करती हैं. असल में निगेटिव चीजें भी पॉजिटिव का ही एक दूसरा पहलू हैं. धूमावती माता सभी बुजुर्ग विधवाओं का प्रतीक हैं. यह बताता है कि किसी भी वृद्धा, विधवा स्त्री को लाचार और कमजोर समझने की भूल न की जाए, उन्हें भी देवी का स्वरूप समझा जाए.

12 स्वरूपों की साधना के लाभ

देवी काली के इन 12 स्वरूपों की उपासना से व्यक्ति के जीवन में गहरा परिवर्तन और आत्मिक शक्ति का विकास होता है. हर स्वरूप अलग-अलग प्रकार की ऊर्जा और आशीर्वाद प्रदान करता है, जिससे साधक जीवन और मृत्यु के सत्य को समझ पाता है. देवी काली के ये 12 स्वरूप केवल पौराणिक कथाएं नहीं हैं, बल्कि जीवन और ब्रह्मांड के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन स्वरूपों को समझकर व्यक्ति आध्यात्मिक यात्रा पर आगे बढ़ सकता है और ज्ञान, शक्ति और आखिरकार मोक्ष को पा सकता है.

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