Holi 2026: 'जब एक पुष्प बाण ने तोड़ी थी तपस्या'...जानें भगवान शिव ने क्यों किया था कामदेव को भस्म?

Holi 2026: रंगों और खुशियों का त्योहार होली जल्द ही आने वाला है, जो चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व प्रेम, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. हिंदू धर्म में होली के इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. आइए आज हम आपको भगवान शिव-कामदेव और राधा-कृष्ण से जुड़ी खास कथाएं से परिचित कराएंगे, जिसके बाद होली का पर्व मनाया जाने लगा.

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क्यों भगवान शिव ने किया था कामदेव को भस्म, पढ़ें होली की कथा (Photo: ITG) क्यों भगवान शिव ने किया था कामदेव को भस्म, पढ़ें होली की कथा (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

Holi 2026: होली हिंदू धर्म का एक प्रमुख और बेहद लोकप्रिय त्योहार है, जिसे खुशी, रंग और आपसी भाईचारे के साथ मनाया जाता है. हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में होली का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और खुशियां बांटते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. होली से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां भी प्रचलित हैं, जिनमें भगवान शिव, माता पार्वती और कामदेव की कथा खास मानी जाती है.  आइए जानते हैं उस विशेष कथा के बारे में.

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होली से संबंधित भगवान शिव और कामदेव की कहानी

कहा जाता है कि माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन शिव जी गहरी तपस्या में लीन थे और उनका ध्यान कहीं और नहीं था. तब प्रेम के देवता कामदेव ने उनकी मदद करने का निर्णय लिया. कामदेव ने शिव जी की तपस्या भंग करने के लिए उन पर पुष्प बाण चलाया. इससे शिव जी का ध्यान टूट गया, लेकिन वे इस बात से बहुत क्रोधित हो गए.  क्रोध में आकर उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी, जिसकी अग्नि से कामदेव भस्म हो गए. यह घटना सभी देवताओं के लिए दुखद थी. 

इसके बाद कामदेव की पत्नी ने भगवान शिव से प्रार्थना की और उन्हें समझाया कि कामदेव ने यह सब माता पार्वती की सहायता के लिए किया था. उनकी बात सुनकर शिव जी का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने कामदेव को अगले जन्म में प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया. मान्यता है कि इसके बाद देवताओं ने खुश होकर रंगों से उत्सव मनाया, जिसे होली की शुरुआत से जोड़ा जाता है. 

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राधा रानी और श्रीकृष्ण की होली की कहानी

रंगों वाली होली का संबंध राधा और श्री कृष्ण की प्रेम कथा से भी जोड़ा जाता है. एक कथा के अनुसार, बाल कृष्ण ने अपनी मां यशोदा से पूछा कि वह राधा की गोरे क्यों नहीं है. इस पर मां ने हंसी-मजाक में कहा कि वे राधा के चेहरे पर रंग लगा दें. इसके बाद श्री कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंग खेलना शुरू किया. तभी से होली को रंगों के त्योहार के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाती है.

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