Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जी से लेकर अश्वत्थामा तक, क्या आज भी धरती पर मौजूद हैं ये 7 चिरंजीवी?

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती के पावन मौके पर जानिए हिंदू धर्म के उन 7 अमर चिरंजीवियों के बारे में, जिनकी मौजूदगी आज भी मानी जाती है. ये कथाएं न सिर्फ रहस्य से भरी हैं, बल्कि धर्म, भक्ति और शक्ति का गहरा संदेश भी देती हैं.

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कलियुग में भी मौजूद हैं ये दिव्य शक्तियां! (Photo: ITG) कलियुग में भी मौजूद हैं ये दिव्य शक्तियां! (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

Hanuman Jayanti 2026: इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जाएगी. हनुमान जयंती का पावन पर्व हर साल भक्तों के लिए आस्था, शक्ति और भक्ति का खास संदेश लेकर आता है. इस दिन भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना के साथ उनकी अमरता और चिरंजीवी होने की मान्यता भी याद की जाती है. कहा जाता है कि हनुमान जी सिर्फ एक देवता ही नहीं, बल्कि उन 7 चिरंजीवियों में शामिल हैं, जो आज भी धरती पर मौजूद हैं और धर्म की रक्षा कर रहे हैं. इसी विश्वास के साथ हिंदू धर्म की कथाओं में 7 चिरंजीवियों का जिक्र मिलता है, जिनकी कहानियां न सिर्फ रहस्यमयी हैं, बल्कि आज भी लोगों की आस्था को मजबूत करती हैं. माना जाता है कि ये सभी चिरंजीवी समय-समय पर दुनिया की रक्षा करते हैं और सही राह दिखाते हैं. आइए जानते हैं 7 चिरंजीवियों के बारे में. 

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कौन हैं वह चिरंजीवी?

हिंदू धर्म के ग्रंथों जैसे विष्णु पुराण, वेद, रामायण और महाभारत, में बार-बार ऐसे लोगों का जिक्र मिलता है, जिन्हें अमर माना गया है. कहा जाता है कि इन्हें खास उद्देश्य के साथ धरती पर भेजा गया था, ताकि वे दुनिया की रक्षा कर सकें और धर्म को बनाए रखें. इन 7 चिरंजीवियों में भगवान हनुमान, विभीषण, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, राजा महाबली, वेद व्यास और परशुराम शामिल हैं. मान्यता है कि समय आने पर ये सभी एक साथ मिलकर किसी बड़े दिव्य काम को पूरा करेंगे.

महाबली हनुमान

भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी अपनी ताकत, भक्ति और सेवा भाव के लिए जाने जाते हैं. इन्हीं गुणों की वजह से उन्हें अमर होने का वरदान मिला था. हनुमान जी का प्रेम, निष्ठा और साहस आज भी लोगों को प्रेरित करता है. मान्यता है कि वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा कर रहे हैं और संकट के समय उनकी मदद करते हैं. वानर रूप में जन्मे हनुमान जी को भगवान राम ने उनकी अटूट भक्ति और शक्ति से प्रसन्न होकर अमरत्व का आशीर्वाद दिया था. तभी से यह माना जाता है कि वे हर युग में धर्म की रक्षा करने और दुनिया की भलाई के लिए मौजूद हैं.

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अश्वत्थामा

महाभारत काल के सबसे रहस्यमयी पात्रों में से एक अश्वत्थामा थे, जो गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे. वे एक बहुत ही शक्तिशाली और निडर योद्धा थे. जहां कुछ लोगों के लिए अमर होना वरदान होता है, वहीं अश्वत्थामा के लिए यह श्राप बन गया था. कथा के मुताबिक, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद अपने पिता की मृत्यु से दुखी और क्रोधित होकर उन्होंने पांडवों के शिविर पर हमला कर दिया और उनके पुत्रों की हत्या कर दी थी. इस घटना से भगवान कृष्ण बेहद नाराज हो गए थे. उन्होंने अश्वत्थामा की शक्तियां छीन ली थीं और उन्हें श्राप दिया कि वे हमेशा के लिए धरती पर भटकते रहेंगे, उनके शरीर पर एक घाव रहेगा जो कभी ठीक नहीं होगा. मान्यता है कि अश्वत्थामा आज भी इसी श्राप के साथ धरती पर भटक रहे हैं और यह दंड कलियुग के अंत तक चलता रहेगा.

राजा महाबली

राजा महाबली एक दयालु और दानवीर असुर राजा थे, जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करते थे. उनकी भक्ति और उदारता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और उनकी परीक्षा ली थी. कथा के अनुसार, वामन भगवान ने महाबली से तीन कदम जमीन मांगी थी. महाबली ने बिना सोचे-समझे हां कर दिया था. इसके बाद भगवान विष्णु ने विराट रूप धारण किया और दो कदम में ही पूरी धरती और आकाश नाप लिया. तीसरे कदम के लिए जगह बची नहीं, तो महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया था. उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया था और अमर होने का वरदान भी दिया था. साथ ही यह आशीर्वाद दिया कि वे हर साल अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे. माना जाता है कि केरल में मनाया जाने वाला ओणम त्योहार राजा महाबली की याद में ही मनाया जाता है. 

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वेद व्यास

महाभारत काल के सबसे महान ऋषियों में वेद व्यास का नाम आता है. माना जाता है कि उन्होंने ही वेदों को व्यवस्थित किया और महाभारत की रचना करवाई, जिसे भगवान गणेश ने लिखा था. कहा जाता है कि उनके पिता ऋषि पराशर ने कठोर तप किया था और एक ऐसे पुत्र की कामना की थी जो महान ज्ञानी हो और अमर रहे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यह वरदान दिया कि उनका पुत्र विष्णु का अंश होगा और दुनिया को ज्ञान देने वाला महान ऋषि बनेगा. इसी कारण वेद व्यास को इतना बड़ा ज्ञान मिला और उन्हें चिरंजीवी माना जाता है, जो आज भी अपनी विद्या के जरिए लोगों का मार्गदर्शन करते हैं.

विभीषण

विभीषण, रावण के छोटे भाई थे, लेकिन उन्होंने हमेशा सच और धर्म का साथ दिया था. उन्होंने रिश्ते से ऊपर उठकर सही का साथ चुना था, जिससे भगवान राम भी उनसे बहुत प्रसन्न हुए थे. रावण के वध के बाद भगवान राम ने विभीषण को लंका का राजा बना दिया था और उन्हें अमर होने का वरदान भी दिया, ताकि वे हमेशा धर्म के रास्ते पर चलते हुए अपनी प्रजा का सही मार्गदर्शन कर सकें.

कृपाचार्य

कृपाचार्य महाभारत काल के महान गुरुओं में से एक थे. वे राजगुरु होने के साथ-साथ एक कुशल योद्धा भी थे. कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद वे कुछ गिने-चुने जीवित बचे लोगों में शामिल थे. उनकी निष्ठा और ज्ञान से प्रसन्न होकर उन्हें अमर होने का वरदान मिला था. मान्यता है कि वे आज भी अपने ज्ञान से लोगों को सही राह दिखाते हैं.

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परशुराम

परशुराम भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं. वे एक योद्धा और ऋषि दोनों थे, जिन्होंने धरती से बुराई को खत्म करने का काम किया था. कहा जाता है कि उन्होंने कई बार अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना की थी. उन्हें अमर होने का वरदान इसलिए मिला, ताकि वे दुनिया में अच्छाई और बुराई के बीच संतुलन बनाए रख सकें. मान्यता है कि कलियुग में वे भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि के गुरु बनेंगे और उन्हें मार्गदर्शन देंगे. 

7 चिरंजीवी कब एक साथ आएंगे?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये सभी चिरंजीवी कई युगों से धरती पर मौजूद हैं और भक्ति, न्याय, ज्ञान और धर्म की रक्षा करते आ रहे हैं. कहा जाता है कि कलियुग के अंत के समय ये सभी एक साथ आएंगे. उस समय भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि प्रकट होंगे और ये चिरंजीवी उनका साथ देंगे. मिलकर वे अधर्म का अंत करेंगे और दुनिया में फिर से धर्म और सच्चाई की स्थापना करेंगे. इन सभी की कथाएं अलग-अलग समय की हैं, लेकिन इनका उद्देश्य एक ही है कि दुनिया में संतुलन बनाए रखना और सही राह दिखाना. इसलिए, माना जाता है कि ये आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं. 

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