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धर्म

7 वक्री ग्रहों के साथ लगा सूर्य ग्रहण, अक्टूबर तक का समय कठिन

aajtak.in
  • 18 जून 2020,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST
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साल 2020 का पहला ग्रहण लग चुकी है. ये ग्रहण कई मायनों में खास रहने वाला है. खासतौर से भारत के लिए ये ग्रहण बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा. एक तरफ महामारी तो दूसरी तरफ चीन से तनातनी जारी है. ज्योतिर्विद प्रतीक भट्ट बता रहे हैं ग्रहों की चाल के बारे में और क्या ये सूर्य ग्रहण भारत और चीन के बीच गंभीर टकराव की स्थिति ला सकता है.

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ये ग्रहण मृगशिरा, आर्द्रा नक्षत्र और मिथुन राशि में लगेगा. ये सूर्य ग्रहण बहुत खास है क्योंकि इस दौरान सात ग्रह वक्री रहेंगे जो देश-दुनिया में कई तरह के बदलाव लेकर आने वाले हैं.

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क्या कहती है ग्रहों की चाल?

मकर राशि का स्वामी शनि मकर राशि में है, ये भारत के भाग्य भाव में है. शनि में जीव के कारक बृहस्पति आ रहे हैं, जो इस समय नीच के भाव में हैं. इसकी वजह से 7 जुलाई तक भारत की स्थिति खराब रहेगी और चीन के साथ स्थितियां और खराब होंगी और दोनों देशों में तकरार और बढ़ेगी.

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दूसरे ग्रहों की बात करें तो ये ग्रहण मिथुन राशि में लग रहा है और वहां पहले से ही राहु है जो पितृदोष बनाकर बैठा है. यहां राहु सूर्य को थोड़ा निर्बल कर रहा है.

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मुख्य ग्रहों की बात करें तो केतु, जो धनु राशि में है और भारत के अष्टम में है, इस समय खराब स्थिति में है. कुछ समय बाद यहां बृहस्पति भी आने वाले हैं. निश्चित तौर पर स्थितियां और खराब होंगी. इसकी वजह से अक्टूबर तक चीन के साथ हमारे संबंध खराब रहेंगे और स्थितियां डांवाडोल रहेंगी.

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हालांकि किसी बड़े युद्ध की संभावना नजर नहीं आ रही है लेकिन छोटी-मोटी झड़प या फिर छोटा सा युद्ध हो सकता है. इसकी बहुत ज्यादा संभावना 21 जून के बाद बनते नजर आ रही है, जो सिंतबर के महीने तक रहेगी. इसके बाद भारत थोड़ा बलशाली होगा और अक्टूबर से स्थितियां भारत के पक्ष में ज्यादा होंगी.

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भारत की कुंडली

भारत की कुंडली से इस सूर्य ग्रहण को देखा जाए तो ये ग्रहण भारत के दूसरे ग्रह यानी धन और वाणी के ग्रह को प्रभावित करेगा. अब भारतीय सेना और मंत्री भी चीन को तीखा जवाब देंगे. ये सारी स्थितियां 21 जून के बाद बन रही हैं.  हालांकि भारत के धन हानि के भी संकेत मिल रहे हैं. कोरोना वायरस की वजह से देश को पहले से ही कुछ नुकसान पहुंच रहा है.

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चीन पर ग्रहण का असर

वहीं चीन की बात करें तो इस समय चीन राहु केतु के प्रभाव में है और मतिभ्रम का शिकार है. वो कई ऐसे निर्णय लेगा जो बहुत खराब होंगे और दुनिया में उसके प्रति आक्रोश और बढ़ेगा. सिंतबर-अक्टूबर तक दुनिया के लिए उसका आक्रोश चरम पर होगा. यही स्थिति चीन को अलग-थलग करेगी. यहां गौर करने वाली बात ये है कि सिर्फ भारत से ही नहीं और भी कई छोटे-मोटे देशों से सितंबर तक चीन के युद्ध की संभावना बन रही है.

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