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धर्म

गुरुवायूर मंदिर: कमल के फूलों से तौले गए मोदी, जानें क्या है तुलाभारम?

सुमित कुमार/aajtak.in
  • 08 जून 2019,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को केरल के त्रिसूर जिले में पहुंचे. मोदी ने यहां भगवान विष्णु के सबसे प्राचीन व लोकप्रिय मंदिर गुरुवायुर में जाकर विशेष पूजा-अर्चना की. इस दौरान मोदी ने मंदिर से जुड़ी तमाम परंपराओं और रीति-रिवाजों के तहत पूजा करते हुए भगवान गुरुवायुरुप्पन के दर्शन किए. गुरुवायुरुप्पन को भगवान विष्णु का ही दूसरा रूप माना जाता है.

photo credit: ANI

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मंदिर में भगवान गुरुवायुरुप्पन के दर्शन करने से पहले मोदी ने परंपरागत विशेष परिधान भी पहना था. इस पोशाक को मुंडु कहा जाता है. उन्होंने कलश के सामने खड़े होकर भगवान विष्णु की अराधना भी की.

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मोदी ने यहां तुलाभारम की रस्म भी पूरी की. इस रस्म के दौरान मोदी को पवित्र तुलाभारम बैठाया गया. धानमंत्री तराजू के एक पलड़े पर बैठे और दूसरे पर कमल के फूल रखे गए. तराजू संतुलित होने के बाद दूसरे पलड़े में रखे कमल दान कर दिए गए. दो महीने पहले, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी यह अनुष्‍ठान किया था.

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पीएम मोदी की विशेष पूजा में कमल के फूलों का इस्तेमाल हुआ. इसके लिए मंदिर प्रशासन ने 112 किलो कमल के फूलों का इंतजाम किया गया था. नरेंद्र मोदी ने 2008 में गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए इस मंदिर में पूजा-अर्चना की थी. तब भी उन्होंने तुलाभारम रस्म अदा की थी.

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क्‍या है तुलाभारम?
तुलाभारम को तुला-दान, तुला-पुरुष आदि भी कहा जाता है. यह रिवाज हिन्‍दू धर्म के सबसे पुराने अनुष्‍ठानों में से एक है. इसमें श्रद्धालु के वजन के बराबर वस्‍तु (सोना, अनाज, फूल या कोई अन्‍य वस्‍तु) तौली जाती है. इसके बाद उस वस्‍तु को दान कर दिया जाता है. यह अनुष्‍ठान ‘षोडश महादान’ में से एक हैं. पुराणों में दान के 16 प्रकार के तरीके बताए गए हैं, जिनमें से एक ‘तुलाभारम’ भी है.

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