वैशाख अमावस्या आने वाली है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान करने का विशेष महत्व बताया गया है. कहते हैं कि इस दिन स्नान-दान करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो सकता है. गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान देने से सुख-समृद्धि बढ़ती है. इस दिन पितृ पूजन और धार्मिक अनुष्ठान भी काफी फलदायी माना जाता है. अमावस्या का पूरा दिन धार्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है. आइए वैशाख अमावस्या की तिथि, दान का महत्व और पूजन विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं.
वैशाख अमावस्या
हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या तिथि 16 अप्रैल को रात 8 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 17 अप्रैल को शाम 5 बजकर 21 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी.
वैशाख अमावस्या पूजा विधि
वैशाख अमावस्या के दिन सवेरे जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें. स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें और व्रत का संकल्प लें. पितरों के लिए तर्पण करते समय तिल, कुश, जल और दूध का उपयोग करना न भूलें. मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है.
पूजा के बाद इन चीजों का करें दान
वैशाख अमावस्या पर पूजा-पाठ के बाद दान-धर्म के कार्य करना शुभ माना गया है. आप सामर्थ्य के अनुसार, किसी भी चीज का दान कर सकते हैं. इस दिन दूध से बनी चीजें, सफेद मिठाई, कपड़े, तिल, जूते-चप्पल और खाने की सामग्री का दान करना अच्छा माना जाता है. इससे मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और उन्नति के द्वार खुलते हैं.
इसके अलावा, आप पेड़-पौधों को पानी, उनकी देखभाल और पशुओं को हरा चारा खिलाना जैसे पवित्र कार्य भी कर सकते हैं. पितृ पूजन के बाद यदि आप कौए या कुत्ते को भोजन कराएंगे तो इसके लाभ कहीं ज्यादा हो सकते हैं.
धन प्राप्ति का उपाय
वैशाख अमावस्या पर एक विशेष उपाय कर धन प्राप्ति का लाभ पाया जा सकता है. ज्योतिषविद कहते हैं कि इस दिन तांबे के एक पात्र में चावल भरकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं. पात्र को सामने रखकर उसके दोनों ओर दीपक जलाएं. फिर उस पात्र पर हाथ रखकर धन प्राप्ति की कामना करें. जब दीपक बुझ जाएं तो पात्र के मुंह पर लाल कपड़ा बांधकर उसे तिजोरी या धन के स्थान पर रख दें.
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