Chandra Grahan 2026: ग्रहण का इन 3 राशियों पर पड़ेगा असर, ज्योर्तिविद ने बताए उपाय, दूर किया असमंजस

chandra grahan 2026: चंद्रगहण का संयोग होने से होली पर्व को लेकर आमजनों में संशय बन रहा है. मसलन होलिका का दहन कब किया जाए, किस दिन रंग खेले जाएं, ग्रहण का प्रभाव होली पर कैसा होगा, आदि कई बातें हैं जिन्हें जाजने की जिज्ञासा सभी के मन में रहती है. इन्हीं बातों को लेकर हमने ज्योर्तिविद लक्ष्मी शुक्ला से चर्चा की.

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चंद्र ग्रहण को लेकर ज्योतिषाचार्यों की राय. चंद्र ग्रहण को लेकर ज्योतिषाचार्यों की राय.

संदीप कुलश्रेष्ठ

  • उज्जैन,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

धार्मिक नगरी उज्जैन में रंगों का पर्व होली इस बार अनूठे और संयमित स्वरूप में मनाया जा रहा है. तिथि वृद्धि और चंद्र ग्रहण के दुर्लभ संयोग के कारण जहां आम जनता में असमंजस था, वहीं ज्योतिषाचार्यों ने धर्मशास्त्रों के अनुसार इसका समाधान कर दिया है.

ज्योर्तिविद लक्ष्मी शुक्ला के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च से आरंभ होकर 3 मार्च तक रहेगी. इस बीच एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना यानी चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है. 2 मार्च (सोमवार) की संध्या प्रदोष काल में विधि-विधान से संपन्न हुआ. 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण सूतक काल और ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए इस दिन रंग खेलना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है. ज्योतिषाचार्य ने सलाह दी है कि 04 मार्च को रंग पर्व मनाना सर्वश्रेष्ठ और मंगलकारी रहेगा.

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राशियों पर प्रभाव और उपाय
ज्योर्तिविद लक्ष्मी शुक्ला ने बताया कि यह ग्रहण देश के उच्च अधिकारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए संयम रखने का संकेत है. उन्होंने सलाह दी है कि ग्रहण काल में अनिष्ट से बचने के लिए दान-पुण्य और ईष्ट देव की आराधना करनी चाहिए. 4 मार्च को अपनी राशि के अनुकूल रंगों का प्रयोग कर उत्सव मनाना सुख-समृद्धि लाएगा. देखें VIDEO:- 

महाकाल मंदिर में 'हर्बल होली'
परंपरा के अनुसार, उज्जैन में होली की शुरुआत महाकालेश्वर मंदिर से होती है. सोमवार संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को लाल हर्बल गुलाल अर्पित कर पर्व का आगाज किया गया. मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में मंत्रोच्चार के साथ होलिका पूजन और दहन किया गया. 

इस अवसर पर कलेक्टर और मंदिर समिति अध्यक्ष रौशन कुमार सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे. श्रद्धालुओं ने जलती हुई होली के बीच विश्व शांति की कामना की. 

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मंदिर परिसर में रंग खेलने पर प्रतिबंध
दो साल पहले भस्म आरती के दौरान हुई आगजनी की घटना से सबक लेते हुए मंदिर समिति ने इस साल भी बेहद सख्ती बरती है: भक्त या पुजारी मंदिर के भीतर बाहरी गुलाल या रासायनिक रंग नहीं ले जा सके. देखें VIDEO:- 

केवल मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए सीमित हर्बल गुलाल से भगवान को प्रतीकात्मक टीका लगाया गया. गर्भगृह और नंदी हॉल में किसी भी तरह के हुड़दंग या गुलाल उड़ाने पर पूरी तरह पाबंदी रही. 

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