Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत आज, जानें क्या है भगवान शिव की पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त और उपासना विधि

Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत पर आज शाम 5 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 29 मिनट तक भगवान शिव की पूजा-उपासना के लिए सबसे खास मुहूर्त माना जा रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार, इस दौरान भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे.

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शुक्र प्रदोष व्रत 2026 (Photo: ITG) शुक्र प्रदोष व्रत 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

Shukra Pradosh Vrat 2026: आज शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. खास बात यह है कि जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तो इसका फल और भी अधिक शुभ माना जाता है.

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ज्योतिषियों के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत इसलिए खास होता है क्योंकि शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और सौभाग्य से होता है. ऐसे में शुक्र प्रदोष व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में खुशियों का संचार होता है और धन से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है. शिवपुराण के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. तो आइए जानते हैं कि शुक्र प्रदोष व्रत पर आज भगवान शिव के पूजन के लिए कौन सा मुहूर्त शुभ रहेगा. 

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 पूजन मुहूर्त ( Shukra Pradosh Vrat 2026 Pujan Muhurat)

हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी यानी कल 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 16 जनवरी यानी आज रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा. 

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प्रदोष पूजा मुहूर्त आज शाम 5 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा, जो कि भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जा रहा है.

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 पूजन विधि (Shukra Pradosh Vrat 2026 Pujan Vidhi)

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है. दिनभर सात्त्विक भोजन ग्रहण किया जाता है या उपवास रखा जाता है. शाम के समय सूर्यास्त से पहले घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई कर ली जाती है. इसके बाद प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है, क्योंकि यही समय शिव आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत अर्पित किए जाते हैं. दीपक और धूप जलाकर श्रद्धा के साथ 'ऊं नमः शिवाय'  मंत्र का जप किया जाता है और प्रदोष व्रत कथा पढ़ी या सुनी जाती है.  

शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat katha)

प्राचीन काल की बात है. एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था. वह सच्चे मन से भगवान शिव का भक्त था, लेकिन गरीबी के कारण उसका जीवन कष्टों से भरा हुआ था. एक दिन उसकी मुलाकात एक साधु से हुई. साधु ने उसे शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व बताया और विधि-विधान से यह व्रत करने की सलाह दी. ब्राह्मण ने साधु की बात मानकर शुक्रवार को आने वाले प्रदोष व्रत का संकल्प लिया. वह पूरे नियम और श्रद्धा के साथ सुबह से व्रत रखता, शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता और ''ऊं नमः शिवाय'' मंत्र का जप करता. उसकी पत्नी भी पूरे मन से पूजा में शामिल होती थी.

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कुछ समय बाद भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए. एक रात शिवजी ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि उसके कष्ट शीघ्र ही समाप्त होंगे. इसके बाद ब्राह्मण के जीवन में धीरे-धीरे सुख और समृद्धि आने लगी. उसकी आर्थिक स्थिति सुधर गई और परिवार में शांति बनी रहने लगी. इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ शुक्र प्रदोष व्रत करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है. इस व्रत के प्रभाव से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को सुख, सौभाग्य और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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