सफलता या खुशी को अपना लक्ष्य मत बनाओ. तुम जितना इसे निशाना बनाओगे और इसके पीछे भागोगे, उतना ही इसे चूकते जाओगे.- विक्टर फ्रैंकल
असल में, सफलता और खुशी को हासिल नहीं किया जाता, ये तो बस घटित होती हैं और ऐसा तब होता है जब आप इनकी परवाह करना छोड़ देते हैं.
पीछा करना छोड़िए, समर्पण करना सीखिए
फ्रैंकल का मानना था कि खुशी कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप बाज़ार से खरीद सकें या मेहनत करके खींच सकें. यह तो एक By-product है. जब आप किसी बड़े काम में खुद को झोंक देते हैं या किसी दूसरे इंसान के प्रति खुद को समर्पित कर देते हैं, तो खुशी और सफलता आपके पीछे-पीछे खिंची चली आती है.
निशाना जितना बड़ा, चूकने का डर उतना ज़्यादा
जब आप केवल सफल होने के लिए काम करते हैं, तो आपका पूरा ध्यान नतीजे (Result) पर होता है. इस चक्कर में आप उस काम का आनंद लेना भूल जाते हैं. फ्रैंकल कहते हैं कि सफलता को एक टारगेट की तरह मत देखो, बल्कि अपने काम को पूरी शिद्दत से करो, सफलता खुद आपका दरवाजा खटखटाएगी.
लेट इट हैपन (इसे होने दें)
जैसे नींद के पीछे जितना भागो वो उतना ही उड़ जाती है, लेकिन जब आप बेफिक्र होकर लेटते हैं तो नींद खुद-ब-खुद आ जाती है. सफलता भी वैसी ही है. जब आप परिणाम की चिंता छोड़कर अपने कर्म में डूब जाते हैं, तो ब्रह्मांड का नियम है कि आपको वह सब मिल जाता है जिसकी आपने चाहत की थी.
निष्कर्ष
अगर आप खुश रहना चाहते हैं, तो खुश होने की कोशिश बंद करें. इसके बजाय, कोई ऐसा काम खोजें जो आपसे बड़ा हो, कोई ऐसा मकसद ढूंढें जो दूसरों की मदद करे. जैसे ही आप खुद को भूलकर काम में खो जाएंगे, सफलता और खुशी आपके जीवन में बिन बुलाए मेहमान की तरह खुद ही प्रवेश कर लेंगी.
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