Premanand Maharaj: अंडा-मांस खाने वाले नहीं, ये 5 चीजें रखने वाले लोग दुनिया में सबसे बलवान: प्रेमानंद महाराज

वृंदावन के प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने सच्ची ताकत की परिभाषा बताई है. उनका कहना है कि अंडा-मांस खाने से ताकत मिलना केवल एक भ्रम है. इसमें उन्होंने सृष्टि के पांच मुख्य तत्व शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध का महत्व भी बताया है.

Advertisement
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि जो लोग अंडा या पशुओं का मांस खाकर खुद को बलवान समझते हैं, वो भ्रम में जी रहे हैं. प्रेमानंद महाराज का कहना है कि जो लोग अंडा या पशुओं का मांस खाकर खुद को बलवान समझते हैं, वो भ्रम में जी रहे हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:28 PM IST

Premanand Maharaj: वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया बड़ा वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्होंने दुनिया के सबसे बलवान व्यक्ति की व्याख्या की है. प्रेमानंद महाराज का कहना है कि जो लोग अंडा या पशुओं का मांस खाकर खुद को बलवान समझते हैं, वो भ्रम में जी रहे हैं. ऐसे लोगों की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है. ऐसे आहार में कोई ताकत नहीं है. ये लोग केवल स्वाद के लिए अंडा और मांस खाते हैं. जबकि हमारी संस्कृति में 36 व्यंजन और 56 प्रकार के भोग ठाकुरजी को लगाए जाते हैं. यदि व्यक्ति इन्हीं का सेवन कर ले तो उसका जीवन सुधर जाएगा.

Advertisement

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि अगर लोग ब्रह्मचर्य का पालन करने लगें और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें तो उनका चेहरा चमकने लगेगा. शरीर से भी बलवान रहेंगे. ब्रह्मचर्य ही सारे बल की जड़ है. जबकि अंडा, मांस खाने वालों की दुर्गति होनी तय है. पशुओं को मारकर खाने वाले सीधे नर्क में जाएंगे. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि पशु-पक्षियों को मारकर खाना राक्षसों का काम है. हम सनातनी हैं और हमें ये काम शोभा नहीं देता है.

इस वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने सृष्टि के पांच खास तत्वों का भी जिक्र किया है. ये तत्व हैं- शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि इन पांच तत्वों पर जो नियंत्रण पा लेगा, उसी को भगवत प्राप्ति होती है. ऐसा व्यक्ति जीवन में सबकुछ जीत सकता है. उन्होंने इन पांच तत्वों के मायने भी समझाए हैं.

Advertisement

शब्द- सांसारिक शब्द हमें कभी आकर्षित न करें. भगवान का भजन हो या महापुरुषों का कोई प्रवचन हो तो हमारे कान उसे सुनने के लिए तैयार रहें.

स्पर्श- धर्मपूर्वक पत्नी का स्पर्श और भगवान के चरण स्पर्श के अलावा हमें कोई दूसरा स्पर्श अच्छा न लगे.

रूप- भगवान या भक्तों के रूप के अलावा दुनिया में कोई रूप हमें आकर्षित न कर सके.

रस- भगवान को अर्पित किया हुआ भोजन, प्रसाद या पेय का आनंद.

गंध- तुलसी, इत्र या धूप जैसी सुगंधों का प्रयोग खुद के बजाए प्रभु को समर्पित होनी चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement