Premananda Maharaj: वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के दरबार में दूर-दूर से भक्त अर्जी लगाने आते हैं. यहां आकर पूज्य महाराज से लोग अपनी समस्याओं का निवारण पूछते हैं. कुछ लोग तो ऐसे सवाल भी पूछ लेते हैं, जिन्हें सुनकर किसी को भी हंसी आ जाए. कुछ दिन पहले ही प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे एक भक्त ने एक ऐसा ही सवाल पूछ लिया. भक्त ने कहा कि मेरी बेटी पूछती है कि आप ऐसी कौन सी क्रीम लगाते हैं जो चेहरे पर सूर्य जैसा तेज बना रहता है.
यह सवाल सुनकर प्रेमानंद महाराज हंस पड़े और बोले कि मैं कोई क्रीम तो इस्तेमाल नहीं करता हूं. लेकिन चेहरे पर रज जरूर लगी है. और रही क्रीम की बात तो पूरी जिंदगी बीत गई, बाबाजी होकर भला क्रीम कैसे लगाएं. यह बोलते हुए प्रेमानंद महाराज फिर से हंस दिए.
इसके बाद प्रेमानंद महाराज ने दरबार में बैठे भक्तों से पूछा कि क्या आपको लगता है कि मेरे चेहरे पर कोई क्रीम लगी है. हां, पर हम जिनकी आराधना करते हैं, वो बहुत सुंदर हैं. जब जिसका चिंतन किया जाता है, तो उसकी आभा आ जाती है. यह उसी का असर है. आप थोड़ा भजन करके देख लो. आपको राधा-कृष्ण की आभा खुद-ब-खुद महसूस होने लगेगी.
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि क्रीम से कभी सुंदरता नहीं आती है. सुंदरता तो वो है जो चित्त को चुरा ले. यह पूर्णत: ईश्वर की कृपा है. बनावटी सुंदरता या श्रृंगार को आप नेत्रों को लुभाने वाला सौंदर्य मान सकते हो. लेकिन वास्तव में वो सुंदर नहीं है. राधारानी और श्रीकृष्ण की भक्ति में एक अनोखा ही श्रृंगार रस है. और हम उनके दास हैं. इसलिए कहीं न कहीं ये उन्हीं का प्रभाव है. हमारे तन-मन पर राधारानी और ठाकुरजी का कब्जा है.
दैवीय संपदा भक्तों में अपने आप जागृत हो जाती है. लेकिन जो जो आकर्षण होता है. वो भगवान की कृपा से प्राप्त होता है.
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