Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज से मिले 9 नवनियुक्त IAS अधिकारी, डर-लालच पर मिला गुरु मंत्र

वृंदावन के प्रेमानंद महाराज के दरबार में हाल ही में 2024 बैच के नवनियुक्त आईएएस अधिकारियों ने अर्जी लगाई थी, जिसमें टॉपर शक्ति दुबे भी शामिल थीं. उन्होंने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि भविष्य में वे कैसे राष्ट्र की बेहतर सेवा कर पाएं.

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नवनियुक्त आईएएस अधिकारियों की एक टोली भी प्रेमानंद जी से गुरु मंत्र लेने उनके आश्रम पहुंची. नवनियुक्त आईएएस अधिकारियों की एक टोली भी प्रेमानंद जी से गुरु मंत्र लेने उनके आश्रम पहुंची.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:44 PM IST

वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के दरबार में अर्जी लगाने दूर-दूर से भक्त आते हैं. खेल जगत से लेकर कई फिल्मी सितारे भी महाराज का आशीर्वाद लेने आ चुके हैं. हाल ही में नवनियुक्त आईएएस अधिकारियों की एक टोली भी प्रेमानंद जी से गुरु मंत्र लेने उनके आश्रम पहुंची. सभी 2024 बैच के आईएएस थे, जिनमें बैच की टॉपर शक्ति दुबे भी शामिल थीं. प्रेमानंद महाराज ने इन्हें आशीर्वाद के साथ-साथ शासन की बागडोर संभालने के लिए एक गुरु मंत्र भी दिया.

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नवनियुक्त IAS अधिकारियों ने प्रेमानंद महाराज से कहा कि अभी हमारी सेवाओं की शुरुआत है. हम आगे ऐसा क्या करें और किन चीजों का ध्यान रखें कि भारत सरकार की बेहतर सेवा कर पाएं.

इस पर प्रेमानंद महाराज ने जवाब देते हुए कहा कि प्रलोभन और भय इंसान को धर्म के रास्ते पर चलने से भटका देता है. भय और प्रलोभन से बचकर अपने कर्तव्यों का पालन करें. भगवान का स्मरण करें. तो यही आपके लिए सच्ची भक्ति बन जाएगा. प्रेमानंद महाराज ने इन नवनियुक्त आईएएस अधिकारियों को भगवत गीता का ज्ञान भी दिया.

प्रेमानंद जी ने कहा, 'महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और उन्हें युद्ध के लिए प्रेरित किया. इसका अर्थ है कि भगवान से तुम्हें जो पद या कार्य मिला है, उसे सही ढंग से पूरा करो. भय या प्रलोभन में आकर उसके विरुद्ध आचरण बिल्कुल न अपनाएं. लालच में आकर किसी निर्दोष को दंड दे दिया और दोषी को मुक्त कर दिया, तो यह धर्म रहित कार्य कहलाएगा. ये कोई जाने या न जाने. लेकिन भगवान तो जान ही रहा है, क्योंकि वो सर्वज्ञ है.

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प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि आज जो लोग इस बात को नहीं समझ रहे हैं, वो पद के दुरुपयोग से ज्यादा पैसा और भोग सामग्री अर्जित करने में जुटे हैं. अगर हमारी सोच ऐसी नहीं है और हम धर्म के मार्ग पर चलकर नमक रोटी में भी खुश हैं. साधारण वेशभूषा और नामजप पर भरोसा रखते हैं तो यकीनन हम सच्ची निष्ठा के साथ राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं. अपने भगवान की सेवा कर रहे हैं, क्योंकि भगवान ही इस सृष्टि के रचयिता हैं.

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