Premanand Maharaj: जीवन में सुख, सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए कुछ बातों में संयम और समझदारी बेहद जरूरी होती है. हर चीज को सार्वजनिक करना या दिखावा करना हमेशा लाभकारी नहीं होता है. कई बार हमारी छोटी-सी नासमझी भी ईर्ष्या, नुकसान या रिश्तों में दरार की वजह बन जाती है. इसलिए, जीवन की बड़ी सीख यही है कि जिंदगी से जुड़ी कुछ अहम चीजों को निजी रखना ही समझदारी होता है. इसी विषय से संबंधित भक्त ने एक सवाल प्रेमानंद महाराज से पूछा. भक्त का यह प्रश्न था कि महाराज जी ऐसा क्यों कहा जाता है कि भजन, भोजन, खजाना और यारी परदे में रहना चाहिए?
प्रेमानंद महाराज ने दिया ये उत्तर
प्रेमानंद महाराज इस प्रश्न का जवाब देते हुए कहते हैं कि इससे आपके जीवन को नजर लग जाती है और फिर हानि हो जाती है. जैसे- आपके पास इस समय 10 लाख रुपये का बंडल रखा है, आप ये बात दूसरों को बता दो. एक घंटा भी मुश्किल से वह पैसा आपके टिक नहीं पाएगा. कोई न कोई हथकंडा अपनाकर तुम्हारे रुपए ले जाएगा.
भजन भी है अनोखा धन
आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि भजन भी आपका ऐसा ही होता है. भजन हमारी साधना होती है और मर्यादा भी होती है. इसी तरह अपने खजाने को, अपने प्रेम को इन सभी को छुपाकर रखना चाहिए. अगर छुपाओगे नहीं तो वह क्षीण हो जाएगा. अपने ईष्ट प्रेम को छुपाना चाहिए. जितना अपना ज्ञान-विज्ञान, अनुभव छुपाओगे, उतना ही वह बढ़ेगा. यदि प्रकाशित कर दोगे तो पक्का सब कुछ खत्म हो जाएगा.
क्या कहता है अनुभव
आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि ये हमारा अनुभव है कि अपने साधन को गुप्त रखना चाहिए. अपनी दिनचर्या को भी प्रकाशित नहीं करना चाहिए. आप अपना जो भजन करते हैं, कभी कोई उसके बारे में जान ना पाए. आपकी कोई पवित्र दिनचर्या जान ना पाए, तभी कोई बात बन सकेगी. जैसे आप अपने धन को छुपाते हैं उसी तरह अपने भजन को भी छुपाकर रखें.
aajtak.in