Pradosh vrat 2026 Date: कब रखा जाएगा शुक्र प्रदोष व्रत, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त

Pradosh vrat 2026:प्रदोष व्रत का संध्या काल या शुभ समय व्रत का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. यह समय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाता है और इस दौरान पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है.

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शुक्र प्रदोष व्रत. शुक्र प्रदोष व्रत.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. यह व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है एक बार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरी बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है. हालांकि, जनवरी 2026 का महीना इस लिहाज से खास है क्योंकि इस दौरान तीन प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं. एक और विशेष बात यह है कि जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी वार के नाम से यह व्रत जाना जाता है. जैसे अगर व्रत सोमवार को हो, तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. प्रदोष काल में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. जनवरी में पड़ने वाले दूसरे प्रदोष व्रत की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि व्रत कल रखा जाएगा या परसों, तो चलिए इसके बारे में जान लेते हैं.

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कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह का प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा. दरअसल, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 जनवरी की रात 8 बजकर 16 मिनट पर हो रही है, जबकि इसका समापन 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा. चूंकि प्रदोष काल 16 जनवरी की संध्या में पड़ रहा है, इसलिए इसी दिन प्रदोष व्रत का पालन किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, साथ ही घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. 

शुक्र प्रदोष व्रत क्यों कहलाएगा

इस बार प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. शुक्रवार के दिन पड़ने वाला यह व्रत विशेष रूप से वैवाहिक सुख, प्रेम और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला माना जाता है. 

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शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ समय

शुक्र प्रदोष व्रत पर पूजा के लिए 2 घंटे 34 मिनट का शुभ समय होगा.16 जनवरी को शाम 6:22 बजे से 8:56 बजे तक प्रदोष पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. इस समय की गई आराधना को बेहद फलदायी माना जाता है, क्योंकि प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा संध्या काल में की जाती है. 

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान शिव के शिवलिंग का जल से अभिषेक करें. शिवजी को बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें, और माता पार्वती की भी विधिपूर्वक पूजा करें. पूजा के समय शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें.अंत में भगवान शिव की आरती करें और व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन ही ग्रहण करें. इस दिन जरूरतमंदों को सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. 

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