Paras Patthar: क्या पारस पत्थर की कहानी काल्पनिक न होकर एक सच्चाई है? क्या सच में ऐसा कोई पत्थर है जो अगर किसी चीज को छू दे तो वह सोना बन जाती है? पौराणिक काल बीत गया, राजाओं का दौर खत्म हो गया, लेकिन इंसान की यह तलाश आज भी जारी है. आज भी देशभर में कई ऐसी जगह हैं जहां लोग पारस पत्थर होने का दावा करते हैं. अकेले मध्य प्रदेश में ही तीन अलग-अलग जगहों पर पारस पत्थर होने की बात लोग कहते हैं. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.
मध्य प्रदेश का रायसेन किला
पारस पत्थर को लेकर सबसे ज्यादा दावे और कहानियां रायसेन किले से ही बाहर आती हैं. लोगों का विश्वास है कि इस किले के अंतिम राजा ने अपनी सेवा और तपस्या से पारस पत्थर पाया था. इस पत्थर को हासिल करने के लिए किले पर करीब 14 बार आक्रमण भी हुआ. फिर एक समय ऐसा आया जब राजा ने आक्रमण के डर से पारस पत्थर को किले में मौजूद एक तालाब में फेंक दिया. कहते हैं कि बहुत ज्यादा गहराई होने के कारण ये पत्थर आज तक किसी को नहीं मिल पाया.
चौरागढ़ किला, नरसिंहपुर
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर स्थित चौरागढ़ किले में भी पारस पत्थर होने का दावा किया जाता है. आस-पास के लोग बताते हैं कि इस किले के एक तालाब में पारस पत्थर गुम है. पारस पत्थर को ढूंढने की कोशिश अंग्रेजों के समय से की जाती रही है. इसे पाने के लिए लोगों ने किले के साथ बहुत तोड़-फोड़ भी की है. यहां लोगों में एक कहानी प्रचलित है कि पारस पत्थर को ढूंढने के लिए एक हाथी के पैर में कड़ी बांधकर तालाब में उतारा गया था. लोहे की वो कड़ी सोने की बन गई थी. तबसे लोगों का यह विश्वास और मजबूत हो गया. अब कोई इसे रहस्य तो कोई भ्रम बताता है, क्योंकि लाख कोशिशों के बावजूद यहां आज तक किसी को पारस नहीं मिला.
दनवारा, पन्ना, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में हीरे की खदान है. यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर दनवारा गांव के लोग एक कुएं में एक रहस्यमयी रोशनी देखने का दावा करते हैं. गांव के लोग कहते हैं कि इस कुएं में कई बार लोगों ने एक अजीब सी रोशनी दिखने का दावा किया है. लोग कहते हैं कि कुएं के अंदर झांकने पर एक चमकीली रोशनी आंखों पर पड़ती है. कुछ लोग यहां पारस मणि होने का दावा करते हैं. हालांकि कुछ लोग इन कहानियों को एक अंधविश्वास बताते हैं.
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