Mangalika Dosha: मंगली और साढ़ेसाती ज्योतिष शास्त्र की दो ऐसी बातें हैं, जिन्हें सुनकर व्यक्ति के मन में डर बैठ जाता है. लेकिन मंगली या साढ़ेसाती हमेशा जातक के लिए नुकसानदायक नहीं होती हैं. आप किस लग्न और राशि के हैं? इस पर भी काफी कुछ निर्भर करता है. जरो सोचिए! साहस और पराक्रम प्रदान करने वाला एक ग्रह भला आपके लिए कैसे खराब हो सकता है. आइए आज इस बारे में विस्तार से जानते हैं. और सबसे पहले तो यही जानते हैं कि मंगली होना किसे कहते हैं.
कब आदमी होता है मंगली?
कुंडली के 12 भावों में से मंगल का पांच भावों में होना व्यक्ति को मंगली या मांगलिक बनाता है. ये भाव हैं- प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश. यदि आपकी कुंडली के इन पांच भावों में मंगल बैठा है तो आप मंगली हैं.
चंद्र कुंडली से मंगली होना
इसके अलावा, यदि आपकी कुंडली में मंगल चंद्रमा के साथ बैठा है तो चंद्र मंगली मान लिया जाता है. कई बार इसके लिए आंशिक मंगली शब्द का प्रयोग भी किया जाता है. असल में चंद्र कुंडली चंद्रमा को लग्न में बैठाकर बनाई जाती है. यदि मंगल ग्रह चंद्रमा के साथ होगा तो वो भी चंद्रमा के साथ लग्न में आज जाएंगे, जिसे चंद्र मंगली या आंशिक मंगली कहा जाता है.
मंगली होने का डर क्यों?
मंगल ग्रह की तीन दृष्टियां होती हैं. चौथी, सातवीं और आठवीं दृष्टि. मंगली होने पर यह दृष्टियां कहीं न कहीं आपके पारिवारिक और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती हैं. इसलिए लोग मंगली होने का नाम सुनते ही डर जाते हैं. हालांकि मांगलिक होने पर भी आपका मंगल राशि व लग्न के अनुसार, कारक बनकर आपकी कुंडली में बैठा है तो मंगली होने पर डरने की जरूरत नहीं है. यह आपको लाभ ही पहुंचाएगा.
किन भावों में क्या प्रभाव देगा मंगल योग?
इस तरह इन पांच भावों में बैठा मंगल आपके वैवाहिक जीवन व कुटुम्ब भाव को किसी न किसी तरह प्रभावित कर रहा होता है. वैवाहिक जीवन के सुख के लिए जरूरी है कि मांगलिक योग के जातकों का विवाह मांगलिक योग वाले जातकों से ही किया जाए. मंगल ग्रह को पुरुष ग्रह माना गया है. यदि लड़की की कुंडली में मांगलिक योग है और उसका विवाह ऐसे युवक से कर दिया जाए जिसकी कुंडली में मांगलिक योग नहीं है तो ऐसे दंपति का वैवाहिक जीवन दुखों में बीतता है.
ऐसे दंपति संतान सुख से भी वंचित रह सकते हैं. दोनों के बीच मनमुटाव रहता है. परिवार में हमेशा कलह रहता है. पत्नी व पति दोनों की कुंडली में मांगलिक योग हो तो ऐसे दंपति का वैवाहिक जीवन सुख व समृद्धि पूर्ण होता है.
अंशु पारीक