Mahashivratri 2026: 15 या 16 फरवरी, कब है महाशिवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चमत्कारी मंत्र

Mahashivratri 2026: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी को दोपहर 05:04 बजे होगा और इसका समापन 16 फरवरी को दोपहर 05:34 बजे होगा. ऐसे में महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा और व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा.

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इस बार महाशिवरात्रि का पर्व श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के दुर्लभ संयोग में आ रहा है. (Photo: Pixabay) इस बार महाशिवरात्रि का पर्व श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के दुर्लभ संयोग में आ रहा है. (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

Mahashivratri 2026: इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा. फाल्गुन माह की शिवरात्रि व्रत का यह दुर्लभ संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सनातन धर्म की शाश्वत परंपरा में महाशिवरात्रि को एक ऐसा दिव्य पर्व माना गया है जिसमें अज्ञान का अंधकार विलीन हो सकता है. साधक के भीतर ज्ञान का दीप प्रज्वलित होता है और जीवन शिव तत्व की अनुभूति से आलोकित हो उठता है. महाशिवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में ज्योतिषाचार्य डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने विस्तार से जानकारी दी है.

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महाशिवरात्रि की तिथि
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी को दोपहर 05:04 बजे होगा और इसका समापन 16 फरवरी को दोपहर 05:34 बजे होगा.  ऐसे में महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा और व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा.

श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि का संयोग
इस बार महाशिवरात्रि का पर्व श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के दुर्लभ संयोग में आ रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई महापर्व सिद्ध योग में पड़ता है तो उसमें किए गए जप, तप, दान और पूजा असाधारण फल प्रदान करती है. सर्वार्थ सिद्धि योग का अर्थ ही है सभी कार्यों की सिद्धि कराने वाला योग. ऐसे में महाशिवरात्रि का यह दुर्लभ संयोग साधकों के लिए सांसारिक सुख ही नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का स्वर्णिम अवसर लेकर आई है.

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था. कठोर तपस्या के पश्चात माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में प्राप्त किया और वैराग्य में लीन शिव ने गृहस्थ जीवन स्वीकार कर लोक कल्याण का मार्ग अपनाया. यह प्रसंग केवल विवाह कथा नहीं बल्कि प्रेम त्याग और समर्पण की पराकाष्ठा का प्रतीक है. इसी कारण महा शिवरात्रि को दांपत्य सुख-सौभाग्य और पारिवारिक स्थिरता का महापर्व भी माना जाता है.

1. ओम नमः शिवाय

2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।

3. ॐ हौं जुं स: मृत्युंजयाय नम:॥

4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 

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