Magh Purnima 2026: माघ पूूर्णिमा कब, कल या परसों? स्नान-दान का शुभ मुहूर्त भी देख लीजिए

Magh Purnima 2026: 1 फरवरी को माघ पूर्णिमा पर स्नान के दो शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. पहला ब्रह्म मुहूर्त होगा जो सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. इसके बाद सुबह 7 बजकर 9 मिनट से सुबह 11 बजकर 58 मिनट तक रवि पुष्य योग में स्नान किया जाएगा.

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माघ पूर्णिमा का स्नान अगर शुभ मुहूर्त में किया जाए तो और भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है. (Photo: ITG) माघ पूर्णिमा का स्नान अगर शुभ मुहूर्त में किया जाए तो और भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:34 PM IST

Magh Purnima 2026: कल माघ पूर्णिमा है. इसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस पूर्णिमा को माघ मास में होने वाले पवित्र स्नानों का अंतिम दिन माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर स्नान और दान करने से शीघ्र पुण्य फल की प्राप्ति होती है. ज्योतिषविदों का कहना है कि माघ पूर्णिमा का स्नान अगर शुभ मुहूर्त में किया जाए तो और भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं कि इस बार माघ पूर्णिमा पर स्नान का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

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माघ पूर्णिमा 2026 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 2 फरवरी को सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए माघ पूर्णिमा का स्नान 1 फरवरी दिन रविवार यानी कल सुबह किया जाना ही उचित है.

स्नान-दान के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5 बजकर 24 मिनट से सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक
रवि पुष्य योग: सुबह 7 बजकर 9 मिनट से सुबह 11 बजकर 58 मिनट तक

माघ पूर्णिमा की पूजा विधि
माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की आराधना का विशेष विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत, स्नान और दान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, तीर्थ या सरोवर में स्नान करें और पितरों के लिए तर्पण अवश्य करें. यदि बाहर स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है.

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स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा प्रारंभ करें. पहले कलश स्थापना कर गणेश भगवान का पूजन करें, फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें. संध्या समय चंद्र देव का पूजन कर उन्हें अर्घ्य अर्पित करें. अंत में पूर्णिमा व्रत कथा या सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करें. पूजा के पश्चात अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को दान दें. इस दिन कंबल, तिल, गुड़, घी या भोजन सामग्री का दान विशेष फलदायी माना जाता है.

नवग्रहों को शांत करने के लिए अलग-अलग दान

  • सूर्य ग्रह से जुड़ी परेशानियों को कम करने के लिए गुड़ और गेहूं का दान करना लाभकारी माना जाता है.
  • चंद्रमा को मजबूत करने और मानसिक शांति पाने के लिए जल, मिश्री या दूध का दान शुभ रहता है.
  • मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव से रक्त संबंधी दोष और कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं. इन समस्याओं से बचाव के लिए मसूर की दाल का दान किया जाता है.
  • बुध ग्रह के कमजोर होने पर त्वचा और बुद्धि से जुड़ी दिक्कतें सामने आ सकती हैं. इससे राहत के लिए हरी सब्जियां और आंवले का दान करना उपयोगी होता है.
  • बृहस्पति ग्रह के कारण मोटापा, पाचन तंत्र और लिवर से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं. इनके समाधान के लिए केला, मक्का और चने की दाल का दान शुभ माना गया है.
  • शुक्र ग्रह के अशांत होने पर मधुमेह और आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में घी, मक्खन और सफेद तिल का दान करना लाभ देता है.
  • शनि ग्रह लंबी चलने वाली बीमारियों और नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है. इसके प्रभाव को कम करने के लिए काले तिल और सरसों के तेल का दान किया जाता है.
  • राहु और केतु के दोष से अजीब और समझ से परे रोग उत्पन्न हो सकते हैं. इन ग्रहों को शांत करने के लिए सात प्रकार के अनाज, काला कंबल तथा जूते-चप्पल का दान करना उचित माना जाता है.
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