Magh Purnima 2026: जब धरती पर उतरेंगे देव! जानें माघ पूर्णिमा की सही तिथि और स्नान-दान का मुहूर्त

Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा 2026 पर चंद्र दर्शन, गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है. 1 फरवरी को बन रहे शुभ योगों में पूजा करने से पुण्य, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के संकेत भी बन रहे हैं.

Advertisement
माघ पूर्णिमा 2026 डेट और तिथि (Photo: ITG) माघ पूर्णिमा 2026 डेट और तिथि (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण और विशेष कहलाती है. शास्त्रों की मानें तो, पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्रदेवता माने जाते हैं. इस दिन सूर्य और चंद्रमा आमने-सामने की स्थिति में होते हैं, जिससे चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में दिखाई देता है और समसप्तक राजयोग बनता है. इसी कारण पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस समय वातावरण और जल तत्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका लाभ पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करने से मिलता है.

Advertisement

यदि किसी कारणवश नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है. शास्त्रों में बताया गया है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान, दान, ध्यान, जप और तप करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और स्नान-दान मुहूर्त (Magh Purnima 2026 Snan Daan Muhurat)

द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी 2026, रविवार की सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 2 फरवरी 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी.

स्नान-दान का मुहूर्त- शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त होता है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. हालांकि, इसके बाद भी स्नान किया जा सकता है लेकिन, ब्रह्म मुहूर्त के बाद के स्नान को राक्षस स्नान कहा जाता है.

Advertisement

शुभ योग और पूजा विधि (Magh Purnima 2026 Shubh Yog & Pujan Vidhi)

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग और रवि पुष्य योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. रवि पुष्य योग सुबह 7 बजकर 11 मिनट से रात 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसे बेहद शुभ माना गया है.

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें. 'ऊं नमो नारायण' मंत्र का जप करें और सूर्य भगवान की विधिपूर्वक पूजा करें. जल में काले तिल डालकर पितरों के लिए तर्पण करना भी शुभ माना जाता है.

माघ पूर्णिमा पर देवताओं का आगमन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी लोक पर विचरण करने आते हैं. इस दिन गंगा स्नान और दान करने से देवगण प्रसन्न होते हैं और साधक को शुभ फल प्रदान करते हैं. विशेष रूप से प्रयागराज में संगम स्नान को अत्यंत फलदायी माना गया है.

पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का महत्व

माघ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन फल-जल पर उपवास रखने का विधान है. यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो एक समय सात्विक भोजन किया जा सकता है. चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को जल अर्पित करना भी शुभ फल देता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माघ माह में श्रीहरि विष्णु गंगा नदी में वास करते हैं, इसलिए गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.

Advertisement

ग्रह शांति और संतान सुख के उपाय

जो लोग ग्रह दोष या गृह शांति चाहते हैं, वे माघ पूर्णिमा के दिन संबंधित ग्रहों के अनुसार दान करके शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, संतान सुख की कामना रखने वाले दंपती इस दिन विशेष दान, हवन और मंत्र जप कर लाभ पा सकते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement