Magh Purnima 2026: सीधे देवताओं तक पहुंचता है माघ पूर्णिमा की रात किया गया दान, बस ये 5 बातें रखें ध्यान

माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म की अत्यंत पावन तिथि मानी जाती है. इस दिन रात्रिकाल में किया गया दान विशेष फलदायी होता है. शास्त्रों के अनुसार, यह दान सीधे ईश्वर तक पहुंचता है और कई गुना अधिक पुण्य देता है.

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 माघ पूर्णिमा की रात को किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य देता है. माघ पूर्णिमा की रात को किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य देता है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:30 PM IST

Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा को अत्यंत पावन तिथि माना गया है. माघी पूर्णिमा केवल स्नान-पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन रात्रिकाल में किया गया दान भी बहुत फलदायी माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा की रात को किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य देता है. इससे पूर्वजन्म के दोष और अशुभ कर्मों का प्रभाव भी कम होता है. ऐसी मान्यताएं है कि यह दान सीधे देवताओं तक पहुंचता है और व्यक्ति के पापों का नाश करता है. इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को है.

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माघ पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा की रात देवता पृथ्वी के निकट विचरण करते हैं और श्रद्धा से किए गए कर्मों को शीघ्र स्वीकार करते हैं. ऐसी भी कहते हैं कि माघ पूर्णिमा की रात किया गया दान केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और आने वाली पीढ़ियों को भी उत्तम फल प्रदान करता है.

माघ पूर्णिमा पर क्या दान करें?
इस पावन तिथि पर अन्न, वस्त्र, तिल, घी, गुड़, कंबल और गर्म कपड़ों का दान करना सबसे अच्छा माना जाता है. दान में दी जाने वाली चीजें अगर गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे तो इसका लाभ अधिक होता है. मान्यता है कि इन चीजों का दान करने से जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है. घर में सुख-संपन्नता का अभाव नहीं रहता है. सामर्थ्य अनुसार दान करने वालों को पुण्य के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्राप्त होती है.

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दान देने की सही प्रक्रिया
मा पूर्णिमा पर दान करने से पहले दान की सही प्रक्रिया भी जान लेना जरूरी है. दान हमेशा ईश्वर का स्मरण करते हुए करना चाहिए. इसके अलावा, दान दाएं हाथ से करें. दान देने के बाद मन में पश्चाताप या खेद न रखें. दान देने के बाद हर जगह उसकी चर्चा न करते रहें. श्रद्धा से किए गए दान को गुप्त रखना ही बेहतर होता है. इस दौरान क्रोध, अहंकार और जल्दबाजी से बचें. यह तीन अवगुण आपके आपके द्वारा दिए गए दान को निष्फल कर सकते हैं.

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