Holashtak 2026 Start Date: आज यानी 24 फरवरी 2026, मंगलवार से होलाष्टक शुरू हो गया है. सुबह 7:01 बजे जैसे ही फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि लगी, वैसे ही 'होलाष्टक' का आगाज हो गया. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज से लेकर होलिका दहन तक के ये 8 दिन बेहद 'भारी' माने जाते हैं. अगर आप कोई नया या शुभ काम शुरू करने की सोच रहे हैं तो ये समय शुभ नहीं माना जाता है. क्योंकि इन 8 दिनों में शुभ कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी लग जाती है. आइए जानते हैं कि आखिर इन दिनों में क्या-क्या करने की मनाही है और इसके पीछे का असली कारण क्या है.
24 फरवरी 2026 का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक
प्रातः सन्ध्या - सुबह 5 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 01 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 2 बजकर 49 मिनट से 3 बजकर 35 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 05 मिनट तक
व्रत-त्योहार - दुर्गाष्टमी व्रत, होलाष्टक आरंभ
होलाष्टक में क्या न करें?
परंपरा और ज्योतिष के अनुसार, इन 8 दिनों में कुछ खास कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योंकि उनका फल शुभ नहीं मिलता:
मांगलिक कार्यों पर रोक: इन 8 दिनों में विवाह (शादी), सगाई, मुंडन, और नामकरण जैसे संस्कार बिल्कुल नहीं किए जाता. माना जाता है कि इस समय ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती, जिससे रिश्तों में खटास आ सकती है.
नए घर में प्रवेश (Griha Pravesh): अगर आपका नया घर बनकर तैयार है, तो होलाष्टक में गृह-प्रवेश की गलती न करें. मान्यता है कि इस समय घर में प्रवेश करने से मानसिक अशांति और कलह बढ़ सकती है. होली के बाद ही नए घर की खुशियां मनाएं.
नया बिजनेस या स्टार्टअप: किसी भी नए व्यापार की शुरुआत या दुकान का उद्घाटन इन 8 दिनों में टाल देना चाहिए. ज्योतिषियों का मानना है कि होलाष्टक में शुरू किया गया काम आर्थिक नुकसान दे सकता है.
बड़ी खरीदारी से बचें: नई गाड़ी, सोना-चांदी या जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री जैसे बड़े निवेश इन दिनों में नहीं करने चाहिए.अगर बहुत जरूरी न हो, तो कीमती सामान की खरीदारी होली के बाद ही करें.
गर्भवती महिलाएं रखें ध्यान: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को सुनसान जगहों पर जाने या देर रात बाहर निकलने से बचना चाहिए.
क्यों माना जाता है इन 8 दिनों को अशुभ?
इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं . एक पौराणिक और दूसरा ज्योतिषीय. पौराणिक कथा के अनुसार, इन्हीं 8 दिनों में राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए क्रूर यातनाएं दी थीं. प्रह्लाद के उन कष्टों वाले दिनों को ही शोक और संयम के रूप में याद किया जाता है.
वहीं ज्योतिष की नजर से देखें तो अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे ग्रह अपनी उग्र अवस्था में होते हैं. जब ग्रहों का स्वभाव ही गुस्से वाला हो, तो उस समय किए गए शुभ कार्यों का परिणाम सुखद नहीं होता.
क्या करें इस दौरान?
भले ही नए काम वर्जित हों, लेकिन यह समय भक्ति और साधना के लिए बहुत शक्तिशाली है. इन दिनों में भगवान विष्णु और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी होता है.
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