Guru Chandra Yuti Gajkesari Yog 2026: वैदिक ज्योतिष में गुरु बृहस्पति को नवग्रहों में अत्यंत शुभ और प्रभावशाली ग्रह माना गया है. देवताओं के गुरु होने के कारण बृहस्पति ज्ञान, धर्म, धन और विस्तार के प्रतीक माने जाते हैं. जब भी गुरु की चाल या स्थिति में परिवर्तन होता है, तो उसका प्रभाव न केवल सभी 12 राशियों पर बल्कि देश-दुनिया की परिस्थितियों पर भी देखने को मिलता है. वर्तमान समय में गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में विराजमान हैं और वे यहां 2 जून 2026 तक रहेंगे. इस दौरान गुरु अन्य ग्रहों के साथ युति और दृष्टि संबंध बनाकर कई शुभ योगों का निर्माण करेंगे.
इसी क्रम में गुरु बृहस्पति और चंद्रमा की युति से एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली गजकेसरी राजयोग बनने जा रहा है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार 29 जनवरी 2026 को शाम 6:30 बजे चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे. गुरु के साथ संयोग बनाकर इस विशेष राजयोग का निर्माण करेंगे. यह योग लगभग 54 घंटे तक प्रभावी रहेगा, लेकिन इसके सकारात्मक परिणाम कई दिनों तक देखने को मिल सकते हैं.
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए गुरु-चंद्र की युति षष्ठ भाव में बनेगी. यह योग कार्यक्षेत्र में चल रही परेशानियों को दूर करने वाला साबित हो सकता है. शत्रुओं पर विजय मिलेगी. प्रतियोगी परीक्षाओं या कानूनी मामलों में सफलता मिलने के योग बनेंगे. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर मान-सम्मान मिल सकता है. स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में भी सुधार देखने को मिलेगा.
धनु राशि
धनु राशि की गोचर कुंडली में गुरु और चंद्रमा की युति सप्तम भाव में बन रही है. यह योग वैवाहिक जीवन और साझेदारी के मामलों के लिए बेहद शुभ माना जाता है. विवाह के इच्छुक जातकों के लिए अच्छे प्रस्ताव आ सकते हैं. व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा और रुके हुए समझौते पूरे हो सकते हैं. साथ ही सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होने के संकेत हैं.
कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु-चंद्र की युति दशम भाव में बनने जा रही है, जो करियर और कर्म क्षेत्र का भाव होता है. इस योग के प्रभाव से नौकरी में पदोन्नति, नई जिम्मेदारी या नई नौकरी मिलने की संभावना बन सकती है. व्यवसाय से जुड़े लोगों को अच्छा मुनाफा हो सकता है. मेहनत का पूरा फल मिलेगा और कार्यक्षेत्र में पहचान बनेगी.
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