फाल्गुन वर्ष का अंतिम महीना होता है. इस वर्ष फाल्गुन मास 2 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा. इस महीने की पूर्णिमा तिथि पर फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इसे फाल्गुन कहा जाता है. इसे उत्साह, उमंग और आनंद का समय माना जाता है. इस दौरान मौसम में बदलाव साफ दिखने लगते हैं. ठंड धीरे-धीरे कम होती है और गर्मी का आगमन शुरू हो जाता है. बसंत ऋतु का प्रभाव बढ़ने से मन, प्रेम और संबंधों में सकारात्मकता आती है. इस समय खान-पान और दिनचर्या में संतुलन जरूरी माना गया है. मानसिक चंचलता पर नियंत्रण रखने का भी यह उपयुक्त समय होता है.
फाल्गुन मास के प्रमुख व्रत-त्योहार
वैसे तो फाल्गुन मास में कई व्रत-त्योहार आते हैं, लेकिन इनमें से कुछ का महत्व बहुत अधिक बताया गया है. फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने चंद्रमा का अवतरण भी हुआ था, इसलिए फाल्गुन में चंद्र देव की आराधना करना भी बहुत उत्तम माना जाता है. इसके अलावा फाल्गुन में प्रेम, उल्लास और भक्ति से जुड़ा पर्व होली भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है.
फाल्गुन के व्रत-त्योहारों की सूची
बृहस्पतिवार, 5 फरवरी- द्विजप्रिय संकष्टी
शनिवार, 7 फरवरी- यशोदा जयंती
रविवार, 8 फरवरी- भानु सप्तमी, शबरी जयंती
सोमवार, 9 फरवरी- जानकी जयंती, कालाष्टमी
गुरुवार, 12 फरवरी- महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती
शुक्रवार, 13 फरवरी- विजया एकादशी, कुंभ संक्रांति
शनिवार, 14 फरवरी- शनि प्रदोष व्रत, विजया एकादशी पारण
रविवार, 15 फरवरी- महाशिवरात्रि, फाल्गुन मासिक शिवरात्रि
मंगलवार, 17 फरवरी- दर्श अमावस्या, फाल्गुन अमावस्या, पहली भौमवती अमावस्या, सूर्य ग्रहण
गुरुवार, 19 फरवरी- फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयंती
शनिवार, 21 फरवरी- ढुण्ढिराज चतुर्थी
रविवार, 22 फरवरी- स्कंद षष्ठी
मंगलवार, 24 फरवरी- होलाष्टक का प्रारंभ
शुक्रवार, 27 फरवरी- आमलकी एकादशी
शनिवार, 28 फरवरी- आमलकी एकादशी पारण
रविवार, 1 मार्च- रवि प्रदोष व्रत
सोमवार, 2 मार्च- फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
मंगलवार, 3 मार्च- होलिक दहन, फाल्गुन पूर्णिमा, चंद्र ग्रहण
बुधवार, 4 मार्च- होली
फाल्गुन महीने में किस देवता की उपासना करें?
फाल्गुन मास में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना को विशेष फल देने वाला माना गया है. इस दौरान बाल स्वरूप, युवा स्वरूप और गुरु स्वरूप तीनों रूपों में कृष्ण की पूजा की जा सकती है. संतान सुख की कामना करने वालों को बाल कृष्ण की उपासना करनी चाहिए. प्रेम, आनंद और दांपत्य सुख के लिए युवा कृष्ण की भक्ति उत्तम मानी गई है. वहीं, ज्ञान और वैराग्य की इच्छा रखने वालों के लिए गुरु कृष्ण की आराधना श्रेष्ठ बताई जाती है.
सावधानियां और नियम
फाल्गुन में संभव हो तो ठंडे या सामान्य तापमान वाले जल से स्नान करें. भोजन में अनाज की मात्रा कम रखें और फलाहार को अधिक प्राथमिकता दें. हल्के, रंग-बिरंगे और आकर्षक वस्त्र पहनें. सुगंध का प्रयोग करें. प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और पूजन करें. पूजा में फूलों का विशेष उपयोग करें. साथ ही, इस पूरे महीने नशीले पदार्थों और मांस-मछली के सेवन से दूरी बनाए रखना शुभ माना जाता है.
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