Eid-Ul-Fitr 2026: जैसे-जैसे पवित्र महीना रमजान खत्म होने के करीब आ रहा है, भारत में मुस्लिम समुदाय के लोग ईद-उल-फितर की तैयारियों में जुट रहे हैं. ईद का त्योहार रोजे खत्म होने की खुशी में मनाया जाता है और इस दिन को लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर मनाते हैं. वहीं, हर साल एक सवाल जरूर उठता है कि ईद कब मनाई जाएगी? दरअसल, इसका जवाब चांद दिखने पर निर्भर करता है. क्योंकि इस्लामी कैलेंडर हिजरी चांद पर आधारित होता है, इसलिए हर साल ईद की तारीख बदलती रहती है.
लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि भारत में ईद का त्योहार हर राज्य में अलग अलग दिनों पर मनाया जाता है. ऐसा कई कारणों की वजह से होता है, जैसे अलग-अलग जगहों पर चांद देखने की परंपरा या राज्यों की भौगोलिक स्थिति और चांद दिखने को लेकर धार्मिक मान्यताएं आदि. तो आइए इस्लामिक स्कॉलर एडवोकेट मुफ्ती उसामा नदवी से समझते हैं कि आखिर क्यों पूरे भारत में ईद-उल-फितर एक ही दिन नहीं मनाई जाती है.
कब है ईद-उल-फितर 2026, 21 या 22 मार्च?
अगर भारत में गुरुवार, 19 मार्च की शाम को चांद दिखाई देता है, तो ईद-उल-फितर शुक्रवार, 20 मार्च को मनाई जाएगी, जो सऊदी अरब के साथ मेल खाएगी. अगर गुरुवार को चांद दिखाई नहीं देता है, तो शुक्रवार, 20 मार्च को रमजान के 30 दिन पूरे हो जाएंगे और ईद-उल-फितर शनिवार, 21 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन लोग मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ेंगे.
भारत के हर राज्य में ईद अलग दिनों पर क्यों मनाई जाती है?
स्कॉलर मुफ्ती उसामा नदवी ने Aajtak.in को बताया कि, 'कुछ राज्यों में लोग पुराने तरीके से चांद देखते हैं. जैसे ही चांद (हिलाल) नजर आता है, उसी के आधार पर शव्वाल महीने की शुरुआत मानी जाती है. लेकिन मौसम, बादल और जगह के हिसाब से चांद अलग-अलग समय पर दिख सकता है, इसलिए तारीख में फर्क आ जाता है. वहीं, कुछ जगहों पर लोग अपने आसपास की मस्जिदों या स्थानीय कमेटियों के आधार पर ईद की तारीख तय करते हैं.
ईद 2026 सभी राज्यों में डेट
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल में 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी.
केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश में 20 मार्च को ईद मनाई जा सकती है.
वहीं, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा में भी 20 मार्च को ईद मनाई जा सकती है.
मध्य प्रदेश, उड़ीसा और असम में 21 मार्च को ईद का त्योहार मनाया जा सकता है.
हालांकि, इन सभी राज्यों में ईद मनाना सिर्फ चांद पर आधारित है.
केरल में क्यों एक दिन पहले मनाई जाती है ईद?
स्कॉलर उसामा नदवी के मुताबिक, 'ईद की तारीख को लेकर भारत जैसे बड़े देश में कंफ्यूजन सामने आता है. खासतौर पर केरल और उत्तर भारत के राज्यों के बीच चांद दिखने में फर्क देखने को मिलता है. केरल में समुद्र किनारे और साफ आसमान होने के कारण चांद जल्दी दिख जाता है, जबकि उत्तर भारत में उसी दिन चांद नजर नहीं आता है. ऐसे में दोनों जगहों पर अलग-अलग दिन ईद मनाना सही माना जाता है.
कैसे चांद का दिखना तय करता है ईद की तारीख?
स्कॉलर उसामा नदवी ने बताया कि, 'हदीस में साफ बताया गया है कि चांद देखकर ही रोजा शुरू करो और चांद देखकर ही खत्म करो. अगर चांद नजर न आए तो 30 दिन पूरे करो. इससे यह समझ आता है कि इस्लामी महीना 29 या 30 दिन का ही होता है. अगर कहीं चांद दिखने की खबर आए, तो उसे मानने के लिए भरोसेमंद गवाहों की जरूरत होती है. सिर्फ सुनी-सुनाई बात या टीवी-इंटरनेट की खबर काफी नहीं मानी जाती है.
ईद-उल-फितर शव्वाल महीने के पहले दिन मनाई जाती है, इसलिए इसकी हर तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है. चांद रात यानी रमजान के 29वें दिन मतलब 19 मार्च को दुनियाभर के मुसलमान चांद देखने का इंतजार कर रहे हैं. अगर 19 मार्च यानी आज रात चांद दिखता है तो ईद 20 मार्च को मनाई जाएगी. अगर चांद नजर नहीं आता, तो रमजान 30 दिन का पूरा होगा और ईद 21 मार्च को मनाई जाएगी.
मेघा रुस्तगी