Lunar Eclipse 2026: नए साल में पूर्णिमा पर रहेगा चंद्र ग्रहण, सूतक काल के दौरान न करें ये काम

Lunar Eclipse 2026: साल 2026 की मार्च महीने की पूर्णिमा बेहद खास होगी. इस दिन चंद्र ग्रहण लगेगा. इस दौरान चंद्रमा लाल रंग में दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है.

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फाल्गुन पूर्णिमा ग्रहण. (Photo: Pixabay) फाल्गुन पूर्णिमा ग्रहण. (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:08 AM IST

Lunar Eclipse 2026 : साल 2026 के मार्च महीने में भारत में एक खास खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा और इस दौरान चंद्रमा लाल रंग में दिखाई देगा. इसे लोग ब्लड मून भी कहते हैं. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 45 मिनट तक चलेगा. भारत में इस दिन शाम के समय चंद्र ग्रहण पूरी तरह दिखाई देगा. इसलिए यह न केवल देखने में सुंदर होगा, बल्कि धार्मिक और पंचांग के हिसाब से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा. 

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इस साल मार्च में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा दो दिन रहेगी. पूर्णिमा 2 मार्च, सोमवार को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी और 3 मार्च, मंगलवार को शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी. ऐसे में होलिका दहन की तिथि तय करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. परंपरा के अनुसार पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन किया जाता है, लेकिन ग्रहण के कारण इस साल शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे. 

खास ध्यान देने वाली बात यह है कि ग्रहण के नौ घंटे पहले, यानी 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक लग जाएगा. सूतक लगने के समय से ग्रहण खत्म होने तक कोई भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान नहीं करना चाहिए. खगोलशास्त्रियों के अनुसार, इस साल मार्च का चंद्र ग्रहण और ब्लड मून बहुत खूबसूरत रहेगा. रात के आकाश में लाल चंद्रमा का नजारा बेहद खूबसूरत दिखेगा. 

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साल 2026 में कुल चार ग्रहण होंगे

पहला ग्रहण 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण होगा. इसे रिंग ऑफ फायर या वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है. इस दौरान सूर्य का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा. यह लगभग 2 मिनट 20 सेकेंड तक रहेगा. यह ग्रहण केवल दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखाई देगा. भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए सूतक काल लागू नहीं होगा. 

दूसरा ग्रहण

दूसरा ग्रहण 3 मार्च को पहला चंद्र ग्रहण होगा, जिसे हम भारत में पूरी तरह देख पाएंगे. यह लगभग 58 मिनट तक रहेगा , इस दौरान चंद्रमा लाल दिखाई देगा. यह ग्रहण धार्मिक और पारंपरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. 

तीसरा ग्रहण 29 जुलाई को सूर्य ग्रहण होगा. यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. 

कब है चौथा ग्रहण

चौथा और आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को दूसरा चंद्र ग्रहण होगा. यह ग्रहण उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा, इसलिए सूतक काल यहां मान्य नहीं होगा. 

खास है पूर्णिमा पर लगने वाला ग्रहण

इस साल मार्च की पूर्णिमा पर आने वाला चंद्र ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह हमें खगोल विज्ञान और धार्मिक परंपरा दोनों के महत्व की याद दिलाता है. इस दिन सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ काम, धार्मिक अनुष्ठान या नए काम शुरू करने से बचना चाहिए. ग्रहण खत्म होने के बाद ही किसी भी कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाएगा. 

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