Chaitra Navratri 2026 Navami Kanya Pujan Muhurat: चैत्र नवरात्र की महानवमी आज, कन्या पूजन के लिए इतनी देर का मिलेगा शुभ मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026 Navami Kanya Pujan Muhurat: चैत्र नवरात्र की महानवमी का विशेष महत्व होता है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन करना बहुत ही महत्वपूर्ण कहलाता है क्योंकि इनके बिना नवरात्र का पारण नहीं होता है. तो आइए जानते हैं कि क्या रहेगा कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त, सही समय और पूजा विधि, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शुभ फल प्राप्त हो सकता है.

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चैत्र नवरात्र 2026 महानवमी कन्या पूजन मुहूर्त (Photo: PTI) चैत्र नवरात्र 2026 महानवमी कन्या पूजन मुहूर्त (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:46 AM IST

Chaitra Navratri 2026 Navami Kanya Pujan Muhurat: आज चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन है, जिसे महानवमी या रामनवमी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाली उपासना का समापन भी इसी दिन होता है. पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है और फिर व्रत का पारण करके नवरात्र का समापन किया जाता है. आइए जानते हैं कि आज चैत्र नवरात्र की नवमी पर कन्या पूजन का क्या शुभ मुहूर्त रहने वाला है. 

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नवरात्र पर कन्या पूजन के लिए ये रहेगा शुभ मुहूर्त (Navami 2026 Kanya Pujan Muhurat)

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च यानी कल सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 27 मार्च यानी आज सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर हो जाएगा.

नवमी कन्या पूजन आज (27 मार्च) सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर 10 बजकर 08 मिनट तक रहेगा.

चैत्र नवरात्र नवमी 2026 संयोग (Chaitra Navratri 2026 Mahanavami Sanyog)

इस बार महानवमी इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं में रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग को बेहद फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि इन योगों में किए गए पूजा-पाठ से दोषों का निवारण होता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है. 

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मां सिद्धिदात्री का महत्व 

महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है. मां का यह स्वरूप भक्तों को सिद्धियां और मनचाहा फल देने वाला माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन उनकी सच्चे मन से पूजा करने पर पूरे नवरात्र की साधना का फल मिल जाता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.

कैसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा? (Maa siddhidatri puja) 

पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद मां सिद्धिदात्री के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें. देवी को फल, मिठाई या नौ प्रकार के भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके बाद 'ऊं ह्रीं दुर्गाय नमः' मंत्र का जाप करें. पूजा के बाद प्रसाद को पहले जरूरतमंद लोगों में बांटें और फिर स्वयं ग्रहण करें.

ऐसे करें कन्या पूजन (Kanya Pujan Vidhi)

मां की पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है. इसके लिए छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका सम्मान किया जाता है. उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है. हलवा, पूरी और चने का प्रसाद इस दिन विशेष रूप से बनाया जाता है. कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी बैठाया जाता है, जिसे भैरव का रूप माना जाता है. भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है और हर उम्र का अपना अलग महत्व होता है. इन कन्याओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, रोग दूर होते हैं और जीवन में सफलता के रास्ते खुलते हैं.

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