March Amavasya 2026: 18 या 19 मार्च, कब है चैत्र अमावस्या? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

March Amavasya 2026: अमावस्या, जिसे 'अमावस' या 'अमावसी' भी कहा जाता है, पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे पवित्र दिन है. इस दिन स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व होता है.

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कब है चैत्र अमावस्या कब है चैत्र अमावस्या

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

March Amavasya 2026 : हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र अमावस्या साल की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है, क्योंकि यह न केवल आध्यात्मिक शुद्धि बल्कि पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने का भी दिन है. साल 2026 में मार्च के महीने में पड़ने वाली यह अमावस्या अपने साथ विशेष पुण्य लेकर आ रही है. मान्यता है कि इस दिन किया गया एक छोटा सा दान और गंगाजल से स्नान व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय कर देता है. अगर आप भी पितृ दोष से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना रखते हैं, तो आइए जानते हैं मार्च में चैत्र अमावस्या की सही तिथि, मुहूर्त के बारे में. 

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चैत्र अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मार्च में अमावस्या तिथि की अवधि इस तरह रहेगी. 

अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026, बुधवार सुबह 08:25 बजे से प्रारंभ होगी. अमावस्या तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार सुबह 06:52 बजे तक समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026 को ही मनाई जाएगी. स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त 19 मार्च, सुबह 05:42 से 07:12 बजे तक रहेगा. 

पितृ शांति और सौभाग्य के लिए अचूक उपाय
इस दिन किए गए कुछ विशेष कार्य न केवल मानसिक शांति देते हैं, बल्कि जीवन की बाधाओं को भी दूर करते हैं. 

गंगा स्नान का पुण्य: इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना 'अमृत स्नान' के समान माना गया है. यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करते हुए स्नान करें. 

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तर्पण और अर्घ्य: अमावस्या पितरों को समर्पित है. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काला तिल, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर पितरों को अर्घ्य दें.  इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. 

दीपदान का महत्व: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. सात परिक्रमा करें. मान्यता है कि पीपल में त्रिदेवों का वास होता है, जिससे शनि दोष में भी राहत मिलती है.

कालसर्प और ग्रह शांति: यदि कुंडली में कालसर्प दोष है, तो इस दिन भगवान शिव का दूध और काले तिल से अभिषेक करें. चांदी के नाग-नागिन के जोड़े को बहते जल में प्रवाहित करना भी शुभ होता है.

अन्न और वस्त्र दान: भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य है. इस दिन तिल, गुड़, अनाज और मौसमी फलों का दान जरूरतमंदों को करें. 

क्या न करें?

  • अमावस्या के दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह परहेज करना चाहिए.
  • इस तिथि पर किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या कलह से बचें, क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक रहता है.
  • देर सुबह तक सोने के बजाय सूर्योदय से पहले उठकर पूजा-पाठ करना चाहिए.
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