April Ekadashi 2026: अप्रैल में कब है एकादशी? जानें वरुथिनी और मोहिनी एकादशी की तारीख

April Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान की कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं.

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अप्रैल 2026 में दो एकादशी पड़ रही हैं. अप्रैल 2026 में दो एकादशी पड़ रही हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

April Ekadashi List 2026: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, इस व्रत के रखने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं. खासकर वैशाख महीने की एकादशी का महत्व और भी ज्यादा होता है, क्योंकि यह महीना भगवान विष्णु को बेहद प्रिय होता है.

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अप्रैल 2026 में दो खास एकादशी पड़ रही हैं वरुथिनी एकादशी और मोहिनी एकादशी.  इस बार खास बात यह है कि दोनों एकादशी सोमवार को हैं, इसलिए इस दिन विष्णु जी के साथ भगवान शिव की पूजा का भी शुभ संयोग बन रहा है.

वरुथिनी एकादशी 2026

यह एकादशी 13 अप्रैल 2026 को है. इसकी शुरुआत 13 अप्रैल को सुबह 1:16 बजे होगी , 14 अप्रैल को सुबह 1:08 बजे खत्म होगी.

पूजा का समय: सुबह 5:58 से 7:34
राहुकाल: सुबह 7:34 से 9:10
शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 से 10:46

व्रत खोलने का समय (पारण): 14 अप्रैल को सुबह 6:54 से 8:31 के बीच

क्या है इसका महत्व

इस एकादशी का व्रत रखने से बहुत पुण्य मिलता है. मान्यता है कि इसका फल हजारों साल की तपस्या के बराबर होता है. यह व्रत पापों को दूर करके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है. खासकर शादीशुदा महिलाओं के लिए यह व्रत शुभ माना जाता है, जिससे सौभाग्य बना रहता है.

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मोहिनी एकादशी 2026

मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इसकी शुरुआत 26 अप्रैल को शाम 6:06 बजे होगी, 27 अप्रैल को शाम 6:15 बजे खत्म होगी.

पूजा का समय: सुबह 9:02 से 10:40
राहुकाल: सुबह 7:23 से 9:02

व्रत खोलने का समय (पारण): 28 अप्रैल को सुबह 5:43 से 8:21 के बीच

क्या है इसका महत्व

मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से मन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं. कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है , जीवन में शांति मिलती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने भी कठिन समय में इस व्रत को किया था.

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