Adhik Maas Purnima 2026: 30 या 31 मई, कब है अधिक मास की पूर्णिमा? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिक मास की पूर्णिमा 30 मई को सुबह 11.57 बजे से लेकर 31 मई को दोपहर 02.14 बजे तक रहेगी. ज्योतिषविदों का कहना है कि पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखा जाएगा और 31 मई को स्नान-दान करना उत्तम होगा.

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मान्यता है कि अधिक मास की पूर्णिमा कई गुना बढ़ाकर फल प्रदान करने वाली होती है. (Photo: ITG) मान्यता है कि अधिक मास की पूर्णिमा कई गुना बढ़ाकर फल प्रदान करने वाली होती है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:26 PM IST

अधिक मास की पूर्णिमा 30 मई को है या 31 मई को? इंटरनेट पर बहुत सारे लोग इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं. मान्यता है कि अधिक मास की पूर्णिमा कई गुना बढ़ाकर फल देने वाली होती है. अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है. इसलिए बहुत सारे श्रद्धालुओं के मन में अधिक मास की पूर्णिमा को लेकर उत्सुकता भी है. आइए जानते हैं कि अधिक मास की पूर्णिमा किस दिन पड़ रही है और इसका शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

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अधिक मास पूर्णिमा तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिक मास की पूर्णिमा 30 मई को सुबह 11.57 बजे से लेकर 31 मई को दोपहर 02.14 बजे तक रहेगी. ज्योतिषविदों का कहना है कि पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखा जाएगा और 31 मई को स्नान-दान करना उत्तम होगा.

अधिक मास की पूर्णिमा का महत्व
अधिक मास की पूर्णिमा को आध्यात्मिक महत्व ज्यादा बताया गया है. यह तिथि भगवान विष्णु और चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से दक्ष होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है. अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है, इसलिए इस पूर्णिमा पर पूजा, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन नदी स्नान, ध्यान और भगवान विष्णु या सत्यनारायण की आराधना करना शुभ माना जाता है.

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कैसे करें पूजा?
अधिक मास की पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर स्नान से पहले पूजा का संकल्प लें. यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें. वरना घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान से पहले जल को माथे से लगाकर प्रणाम करें और फिर स्नान करें. इसके बाद स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें. सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें. इसके बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें. उन्हें पीले फल, पीली मिठाई, धूप, दीप, सुगंध आदि अर्पित करें. फिर श्री हरि के मंत्रों का जाप करें.

दांपत्य सुख और सुख-शांति के उपाय
पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद बरगद या पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें. वृक्ष के चारों ओर श्रद्धा से पीला धागा बांधें और शांत मन से बैठकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ गौरीशंकराय नमः” मंत्र का जाप करें. इसके बाद वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और स्थिरता की प्रार्थना करें. मान्यता है कि इस दिन वृक्षारोपण करने और प्रकृति की सेवा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और रिश्तों में मधुरता आती है.
 

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