Shani Pradosh Vrat 2023: आषाढ़ माह का आखिरी शनि प्रदोष व्रत आज, जानें पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Shani Pradosh Vrat 2023: प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की उपासना की जाती है. हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है. इस बार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत शनिवार के दिन है. ऐसे में व्रती को शिव और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त होगी.

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शनि प्रदोष व्रत 2023 शनि प्रदोष व्रत 2023

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 6:46 AM IST

Shani Pradosh Vrat 2023: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो बार प्रदोष व्रत की तिथि आती है. प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे मंगलकारी दिन माना जाता है. प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों तिथियों में ही रखा जाता है. इस बार प्रदोष व्रत 01 जुलाई यानी आज रखा जा रहा है. ये प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ रहा है इसलिए इसे आज शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. साथ ही इस दिन शिव जी के साथ-साथ शनिदेव की आराधना करने से सभी हर तरह की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. शनिवार के दिन ये प्रदोष व्रत पड़ रहा है इसलिए ये प्रदोष व्रत बेहद खास माना जा रहा है.

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शनि प्रदोष व्रत का महत्व (Shani Pradosh Vrat 2023 Significance)

पुराणों के अनुसार, इस व्रत को करने से लम्बी आयु का वरदान मिलता है. हालांकि, प्रदोष व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है, लेकिन शनि प्रदोष का व्रत करने वालों को भगवान शिव के साथ ही शनि की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसलिए इस दिन भगवान शिव के साथ ही शनिदेव की पूजा अर्चना भी करनी चाहिए. मान्यता है कि ये व्रत रखने वाले जातकों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मृत्यु के बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

शनि प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त (Shani pradosh vrat 2023 shubh muhurat)

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 01 जुलाई यानी आज सुबह 01 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो रही है. इसका समापन 01 जुलाई को आज रात 11 बजकर 07 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, 01 जुलाई यानी आज ही शनि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. 04 मार्च की शाम 07:21 बजे से लेकर रात 09:24 बजे तक प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. साथ ही आज रवि योग भी बनने जा रहा है.   

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शनि प्रदोष व्रत पूजन विधि (Shani pradosh vrat 2023 Pujan Vidhi)

शिव मंदिरों में शाम के समय प्रदोष काल में शिव मंत्र का जाप करें. शनि प्रदोष के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठें और स्नान करके साफ कपड़े पहनें. गंगा जल से पूजा स्थल को शुद्ध कर लें. बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से भगवान शिव की पूजा करें. इसके बाद ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव को जल चढ़ाएं. शनि की आराधना के लिए सरसों के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं. एक दीपक शनिदेव के मंदिर में जलाएं. व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि पर ही करें. 

शनि प्रदोष व्रत की सावधानियां और नियम (Shani pradosh vrat Niyam)

1. मंदिर और सारे घर में साफ सफाई का ध्यान रखें. 
2. साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही भगवान शिव और शनि की पूजा अर्चना करें. 
3. शनि प्रदोष व्रत में मन में किसी तरीके के गलत विचार ना आने दें. 
4. घर के सभी लोग आपस में सम्मान पूर्वक बात करें.
5. शनि प्रदोष व्रत में बड़ों का निरादर ना करें और ना ही माता पिता का निरादर करें. 
6. शनि प्रदोष व्रत में हरे भरे पेड़-पौधों को ना तोड़ें. 
7. सारे व्रत विधान में अपने आप को भगवान शिव और शनि को समर्पण कर दें.

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