kalashtmi 2022: आज है कालाष्टमी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Kalashtmi 2022: आज कालाष्टमी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन ही भगवान शिव ने बुरी शक्तियों का नाश करने के लिए रौद्र रुप धारण किया था और काल भैरव भगवान शिव का ही एक स्वरूप है. इसके अलावा देश के कई हिस्सों में इस दिन माँ दुर्गा की पूजा भी की जाती है. कालाष्टमी अथवा काल अष्टमी की हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है.

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आज है कालाष्टमी? जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि आज है कालाष्टमी? जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 6:14 PM IST

Kalashtmi 2022: हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी पूजा की जाती है. इस महीने कालाष्टमी 19 अगस्त यानी आज शुक्रवार के दिन मनायी जाएगी. इस दिन भगवान शिव के ही एक अवतार काल भैरव की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से घर में फैली हुई सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन ही भगवान शिव ने बुरी शक्तियों का नाश करने के लिए रौद्र रुप धारण किया था और काल भैरव भगवान शिव का ही एक स्वरूप है. इसके अलावा देश के कई हिस्सों में इस दिन माँ दुर्गा की पूजा भी की जाती है. कालाष्टमी अथवा काल अष्टमी की हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है. कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है. भगवान कालभैरव के भक्त  हर महीने कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करते है. 

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कालाष्टमी व्रत का महत्व

काल-भैरव भगवान शिव का ही एक रूप हैं, ऐसे में कहा जाता है कि जो कोई भी भक्त इस दिन सच्ची निष्ठा और भक्ति से कालभैरव की पूजा करता है, भगवान शिव उस इंसान के जीवन से सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालकर उसको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. 

कालाष्टमी शुभ मुहूर्त (Kalashtmi 2022 shubh muhurat) 

उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद माह का कालाष्टमी व्रत आज 19 अगस्त को है. हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी ति​थि का प्रारंभ 18 अगस्त को रात 09 बजकर 20 मिनट पर हुई,  यह तिथि आज 19 अगस्त को रात 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगी. 

कालाष्टमी पूजन विधि (Kalashtmi 2022 pujan vidhi) 

कालाष्टमी के दिन शिवजी के रूप काल भैरव की पूजा करनी चाहिए. इस दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करके व्रत करना चाहिए और फिर किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव या भैरव के मंदिर में जा कर पूजा करनी चाहिए. शाम के समय शिव और पार्वती और भैरव जी की पूजा करें. क्योंकि भैरव को तांत्रिकों का देवता माना जाता है इसलिए इनकी पूजा रात में भी की जाती है.काल भैरव की पूजा में दीपक, काले तिल, उड़द और सरसों के तेल को अवश्य शामिल करें. व्रत पूरा करने के बाद काले कुत्ते को मीठी रोटियां खिलाएं.

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