Indira Ekadashi 2021: पितरों के मोक्ष के लिए इंदिरा एकादशी व्रत आज, भूलकर भी न करें ये गलतियां

Indira Ekadashi 2021: प्रत्येक एकादशी महत्वपूर्ण होती है और इस दिन जो भी व्रत रखता है, उसे बैकुंठ प्राप्त होता है. लेकिन व्रत रखने वालों के साथ ही ऐसे लोगों के लिए भी कुछ खास नियम हैं, जिन्होंने व्रत नहीं रखा है. इस दिन कुछ काम ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें करने से बचना चाहिए.

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Indira Ekadashi 2021 Indira Ekadashi 2021

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 02 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 10:05 AM IST
  • द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करें व्रत का पारण
  • इंदिरा एकादशी के दिन भूलकर भी नहीं खाएं चावल

Indira Ekadashi 2021: पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए इंदिरा एकादशी का व्रत आज है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत नियमों का पालन करने से सात पीढ़ियों तक के पितर तृप्त होते हैं. उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. एकादशी व्रत को लेकर कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है. हालांकि प्रत्येक एकादशी महत्वपूर्ण होती है और इस दिन जो भी व्रत रखता है, उसे बैकुंठ प्राप्त होता है. लेकिन व्रत रखने वालों के साथ ही ऐसे लोगों के लिए भी कुछ खास नियम हैं, जिन्होंने व्रत नहीं रखा है. इस दिन कुछ काम ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें करने से बचना चाहिए. 

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भूलकर भी चावल न खाएं 
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी दो अक्टूबर यानि आज है. इस दिन व्रत करने का विशेष महत्व है. प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इसलिए इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये व्रत दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होता है. उसके बाद भोजन नहीं करना है. इस दिन भूलकर भी चावल नहीं खाने हैं. हालांकि व्रत करने वाले तो भोजन नहीं करते हैं, लेकिन जिन्होंने व्रत नहीं रखा है, वो भी चावाल नहीं खाएं. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले और हरि वासर समाप्त होने के बाद ही करें. 

सभी का सम्मान करें
वैसे तो अपनी वाणी पर हमेशा संयम रखना चाहिए, लेकिन एकादशी व्रत के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि भूलकर भी आपके मुख से कोई अपशब्द न निकले. सभी का सम्मान करें और आदर व प्रेम से बात करें. यदि भूलवश कोई अपशब्द निकल भी जाए, तो भगवान श्री हरि विष्णु के समक्ष क्षमा प्रार्थना करें. व्रत में पूरा समय ईश्वर का स्मरण करें. दशमी तिथि से द्वादशी तिथि तक पूर्णतया ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. 

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