शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के पूजन से मिलेगी निरोग काया...

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस पर्व को 'कोजागरी पूर्णिमा' के रूप में भी मनाया जाता है. साल शरद पूर्णिमा 15 अक्टूबर को मनाई जाएगी और इस दिन शनिवार पड़ रहा है...

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शरद पूर्णिमा 2016 शरद पूर्णिमा 2016

वन्‍दना यादव

  • नई दिल्‍ली,
  • 25 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST

आश्चिन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. शरद पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है.

इस दिन श्रीसूक्त, लक्ष्मीस्तोत्र का पाठ करके हवन करना चाहिए. इस विधि से कोजागर व्रत करने से माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं तथा धन-धान्य, मान-प्रतिष्ठा आदि सभी करती हैं.

शरद पूर्णिमा व्रत विधि
- पूर्णिमा के दिन सुबह में इष्ट देव का पूजन करना चाहिए.
- इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए.
- ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए.
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है.
- रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए.
- मंदिर में खीर आदि है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है.

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शरद पूर्णिमा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो यह अवश्य सफल होता है. तीसरे पहर इस दिन व्रत कर हाथियों की आरती करने पर उतम फल मिलते है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृ्ष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था. इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने की किवदंती प्रसिद्ध है. इसी कारण इस दिन खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखकर अगले दिन प्रात: काल में खाने का विधि-विधान है.

शरद पूर्णिमा व्रत कथा
कथानुसार एक साहूकार की दो बेटियां थी और दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थी. बड़ी बेटी ने विधिपूर्वक व्रत को पूर्ण किया और छोटी ने व्रत को अधूरा ही छोड़ दिया. फलस्वरूप छोटी लड़की के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते थे. एक बार बड़ी लड़की के पुण्य स्पर्श से उसका बालक जीवित हो गया और उसी दिन से यह व्रत विधिपूर्वक पूर्ण रूप से मनाया जाने लगा. इस दिन माता महालक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. विधिपूर्वक व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.

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क्यों लगाया जाता है खीर का भोग?
इस दिन व्रत रख कर विधिविधान से लक्ष्मीनारायण का पूजन करें और रात में खीर बनाकर उसे रात में आसमान के नीचे रख दें ताकि चंद्रमा की चांदनी का प्रकाश खीर पर पड़े. दूसरे दिन सुबह स्नान करके खीर का भोग अपने घर के मंदिर में लगाएं कम से कम 3 ब्राह्मणों को खीर प्रसाद के रूप में दें और फिर अपने परिवार में खीर का प्रसाद बांटें. इस प्रसाद को ग्रहण करने से अनेक प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है.

क्या कहता है विज्ञान...
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा हमारी धरती के बहुत करीब होता है. इसलिए चंद्रमा के प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे-सीधे धरती पर गिरते हैं. खाने-पीने की चीजें खुले आसमान के नीचे रखने से चंद्रमा की किरणे सीधे उन पर पड़ती है जिससे विशेष पोषक तत्व खाद्य पदार्थों में मिल जाते हैं जो हमारी सेहत के लिए अनुकूल होते हैं.

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