देव दिवाली आज... नदी-तालाब के किनारे गेहूं के दाने बिछाकर उस पर जलाएं 11 दीपक, कर्ज, रोग और पितृदोष से मिलेगी मुक्ति

कार्तिक मास की पूर्णिमा को दीपदान करने का विशेष धार्मिक महत्व है, जो पितृ शांति, कर्ज मुक्ति, रोगों से राहत और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति प्रदान करता है. नदी तट या तालाब पर दीपदान करने से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

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देव दीपावली पर दीपदान का महत्व है देव दीपावली पर दीपदान का महत्व है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

सनातन परंपरा में कार्तिक मास की पूर्णिमा का महत्व दिवाली के दिन की ही तरह है, बल्कि उससे भी अधिक है. कार्तिक पूर्णिमा को नदी तट पर दीपदान करने का महत्व बताया गया है. अगर आप नदी तट पर दीपदान नहीं कर पा रहे हैं तो आस-पास किसी तालाब या जल स्त्रोत पर भी दीपदान कर सकते हैं. इस दीपदान का फल इतना है कि आप कर्ज की परेशानी से मुक्त हो सकते हैं और अगर पितृ दोष से पीड़ित हैं, विवाह के योग नहीं बन रहे हैं और रोग से परेशान हैं तो इसका भी निदान हो सकता है. 

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कार्तिक महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दौरान भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है. इसके अलावा, कार्तिक माह में दीपदान करना बहुत ही विशेष माना जाता है.

नदीतट या तालाब पर दीपदान का महत्व 
पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष, देवताओं की कृपा प्राप्ति, और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए है. यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और व्यक्ति को अकाल मृत्यु और पापों से बचाता है. विशेष रूप से, कार्तिक मास और कार्तिक पूर्णिमा जैसे अवसरों पर किया गया दीपदान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. 

पितरों की शांति: नदी के तट पर दीपदान करने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है.
कर्ज से मुक्ति: इससे देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, देवी लक्ष्मी के प्रसन्न होने से कर्ज से मुक्ति मिलती है.
नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: दीपदान घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

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पापों से मुक्ति: कार्तिक पूर्णिमा का दीपदान पातक हरण भी करता है. वह पापों को नष्ट करके शुभ लक्षणों को बढ़ाता है.

अकाल मृत्यु से बचाव: दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता है.
ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचाव: यह यम, शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभावों से भी बचाता है.
शुभ और पुण्य: सभी स्नान पर्वों और व्रत के समय दीपदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

नदीतट पर कैसे करें दीपदान
दीपदान के लिए मिट्टी, तांबा, चांदी या पीतल का दीपक इस्तेमाल कर सकते हैं. दीपक में गाय का घी या तेल और रुई या कलावा की बत्ती डालें. दीपक को चावल या गेहूं के आसन पर रखें. प्रदोष काल या सूर्यास्त के बाद नदी के तट पर दीपक को बहते जल में प्रवाहित करें, या नदी के किनारे जलाएं.

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